बैटरी या मोटर के बिना सिर्फ़ ध्वनि से चलने वाले EPFL के सूक्ष्म रोबोट
EPFL के इंजीनियरों ने ऐसी छोटी नावें और उड़ने वाले 'माइक्रोफ़्लायर' बनाए हैं, जो आसपास की ध्वनि तरंगों को सीधे प्रणोदन में बदल देते हैं। इससे बैटरी या मोटर न समा सकने जितने छोटे रोबोट बनाने का रास्ता खुलता है।
चरण दर चरण
- 1
आसपास की ध्वनि कैविटी में प्रवेश करती है
- 2
फंसी हवा तय आवृत्ति पर गूंजती है
- 3
संकेंद्रित हवा की धारा बाहर धकेली जाती है
- 4
असंतुलन दिशात्मक प्रणोदन बनाता है
इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे-जैसे छोटे होते जाते हैं, एक बुनियादी समस्या सामने आती है। कुछ उपकरण इतने छोटे हो जाते हैं कि उनमें पारंपरिक बैटरी, मोटर या चलने वाले पुर्ज़े समा ही नहीं पाते। EPFL के इंजीनियरिंग स्कूल स्थित माइक्रोबायोरोबोटिक सिस्टम्स (MICROBS) प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने इसका एक असामान्य हल खोजा है: ध्वनि।
यह तकनीक हेल्महोल्ट्ज़ अनुनाद पर आधारित है। यह वही असर है जो बोतल की गर्दन पर हवा फूंकने से गूंजती आवाज़ पैदा करता है। ध्वनि कैविटी नामक एक खोखली संरचना के भीतर फंसी हवा, एक ख़ास आवृत्ति पर ज़ोर से कंपन करती है। जब ध्वनि तरंगें उस हवा को कंपित करती हैं, तो कैविटी हवा की एक संकेंद्रित धारा बाहर धकेलती है। भीतर आने वाली हवा ज़्यादा फैली हुई होती है। यही असंतुलन प्रणोदन बनाता है।
वैज्ञानिकों को लंबे समय से पता है कि ध्वनि तरंगों से वस्तुओं को हवा में तैराया जा सकता है। लेकिन उन प्रयोगों में, बाहरी ध्वनि से वस्तुएं निष्क्रिय रूप से धकेली जाती हैं। प्रयोगशाला के प्रमुख सेल्मान साकार ने कहा, 'उपकरणों को ध्वनि तरंगों से धकेलने के बजाय, हमने ऐसे ध्वनि अनुनादक बनाए हैं जो ख़ास आवृत्तियों पर ध्वनि का उपयोग कर दिशात्मक प्रणोदन और नियंत्रित गति पैदा करते हैं।'
टीम ने पहले छोटी नावें बनाईं। हर एक में अलग-अलग आवृत्तियों पर सेट तीन कैविटी थीं। ध्वनि की आवृत्ति बदलकर नाव को मनचाही दिशा में मोड़ा जा सकता था। उन्होंने 150 माइक्रोग्राम जितने हल्के 'माइक्रोफ़्लायर' नामक उड़ने वाले सूक्ष्म ड्रोन भी बनाए। हर एक में तीन सूक्ष्म कैविटी थीं। इंसानी कान को सुनाई न देने वाली अल्ट्रासोनिक आवृत्तियों से ये चलते थे।
एक अन्य डिज़ाइन में, शोधकर्ताओं ने कैविटी को छोटे प्रोपेलर ब्लेड के साथ जोड़ा। इन कैविटी ने ब्लेड को 13,000 चक्कर प्रति मिनट की गति से घुमाने लायक़ बल पैदा किया। यह सामान्य ड्रोन प्रोपेलर की कई हज़ार चक्कर प्रति मिनट की गति से भी तेज़ है। टीम का कहना है कि यह तरीक़ा आगे चलकर पारंपरिक बैटरी और मोटर के बिना काम करने वाले उपकरण और रोबोट बना सकता है। इसमें अलग-अलग आवृत्तियों से सक्रिय होकर स्वतंत्र रूप से हिलने वाले कई ध्वनि-संवेदी हिस्सों वाले लचीले उपकरण भी शामिल हैं।
