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ध्वनि तरंगों से क्वांटम जानकारी की सुरक्षा: हार्वर्ड की नई खोज

हार्वर्ड के शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि लगातार चलने वाला यांत्रिक कंपन क्षेत्र, यानी फोनॉन, हीरे में मौजूद एक क्यूबिट को शोर से बचा सकता है, जिससे उसकी क्वांटम कोहेरेंस अवधि लगभग तीन गुना बढ़ जाती है।

चरण दर चरण

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    हीरे में इलेक्ट्रॉन स्पिन जानकारी संग्रहित करता है

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    फोनॉनिक कैविटी से फोनॉन जानकारी पहुंचाते हैं

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    ऐसी कैविटी में माइक्रोवेव पल्स विफल

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    लगातार फोनॉन क्षेत्र 'ड्रेस्ड' क्यूबिट बनाता है

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    कोहेरेंस अवधि लगभग तीन गुना बढ़ी

हार्वर्ड की जॉन ए. पॉलसन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड अप्लाइड साइंसेज (SEAS) के शोधकर्ताओं ने क्वांटम जानकारी को सुरक्षित रखने का एक नया तरीका खोजा है, जिसमें फोनॉन इस्तेमाल किए जाते हैं. यानी यांत्रिक कंपन के सूक्ष्म पैकेट, असल में सूक्ष्म ध्वनि तरंगें। मार्को लोंचार की प्रयोगशाला में हुआ यह शोध नेचर फिजिक्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और यह चिप-आधारित क्वांटम नेटवर्क तथा अलग-अलग तरह के क्यूबिट (क्वांटम बिट) जोड़ने वाले हाइब्रिड सिस्टम में मदद कर सकता है।

क्वांटम नेटवर्किंग का एक तरीका हीरे के अंदर एक खामी से जुड़े इलेक्ट्रॉन के स्पिन में जानकारी संग्रहित करता है, फिर फोनॉन की मदद से उसे क्यूबिट नोड्स के बीच पहुंचाता है। इसमें एक 'फोनॉनिक कैविटी' मदद करती है, जो कंपनों को रोककर स्पिन के साथ उनकी पकड़ मज़बूत बनाती है। फोनॉन की तरंगदैर्घ्य प्रकाश से कहीं छोटी होती है, इसलिए छोटे उपकरण बनाए जा सकते हैं, और फोनॉन ठोस-अवस्था स्पिन तथा विद्युत-चुंबकीय क्षेत्रों दोनों के साथ आसानी से जुड़ जाते हैं।

इससे एक समस्या पैदा होती है: क्वांटम मेमोरी को बचाए रखना। क्यूबिट अपने आसपास के माहौल के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं और जानकारी संग्रहित व प्रोसेस करने के लिए उन्हें अपनी क्वांटम अवस्था लंबे समय तक बनाए रखनी पड़ती है, जिसे कोहेरेंस कहा जाता है। आमतौर पर माइक्रोवेव पल्स की मदद से मेमोरी को शोर से अलग कर संरक्षित किया जाता है, लेकिन फोनॉनिक कैविटी के अंदर रखे क्यूबिट के लिए यह तरीका ठीक से काम नहीं करता। इससे फोनॉन के साथ मज़बूत जुड़ाव और लंबी कोहेरेंस दोनों एक साथ पाना मुश्किल हो जाता है।

लोंचार की प्रयोगशाला से हाल ही में पीएचडी करने वालीं और अब बोस्टन यूनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता एलिज़ा कॉर्नेल ने इस टीम का नेतृत्व किया। उसी समूह की पूर्व पोस्टडॉक्टरल विद्वान झूजिंग शू के साथ मिलकर उन्होंने इसे 'पूरी तरह यांत्रिक कोहेरेंस सुरक्षा' नाम की विधि से हल किया। माइक्रोवेव पल्स की जगह, हीरे में मौजूद सिलिकॉन-वेकेंसी स्पिन पर लगातार चलने वाला यांत्रिक कंपन क्षेत्र लगाया गया। इससे वह क्यूबिट एक 'ड्रेस्ड' क्यूबिट बन जाता है, यानी वह लगातार एक ध्वनि क्षेत्र मानो 'पहने' रहता है, जिससे वह कम आवृत्ति वाले शोर से कम प्रभावित होता है। कॉर्नेल ने कहा, 'हम दो समस्याएं हल कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि स्पिन फोनॉन के साथ मज़बूती से जुड़े, और स्पिन की कोहेरेंस अवधि भी लंबी हो।'

यह सुरक्षा फोनॉनिक कैविटी के अनुकूल एक यांत्रिक क्षेत्र से मिलती है, इसलिए वही संरचनाएं क्वांटम जानकारी को आगे भी पहुंचा सकती हैं और उसे शोर से बचा भी सकती हैं। इस नई विधि से शोधकर्ताओं ने सिलिकॉन-वेकेंसी स्पिन की कोहेरेंस अवधि लगभग तीन गुना बढ़ा दी।

शब्दों की व्याख्या

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