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एआई टूल प्रोटीनटॉक्स स्तन कैंसर की सटीक दवा का अनुमान लगाता है

नया एआई सिस्टम प्रोटीनटॉक्स दवा देने के बाद कैंसर कोशिकाओं में प्रोटीन में होने वाले बदलावों को ट्रैक कर दवा के असर का सटीक अनुमान लगाता है। यह ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर के लिए नए दवा संयोजनों और प्रतिरोध की पहचान भी करता है, नेचर पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन…

चरण दर चरण

  1. 1

    दवा से पहले और बाद प्रोटीन मापना

  2. 2

    समय-आधारित प्रोटीन डेटा पर एआई प्रशिक्षित करना

  3. 3

    दवा असर और प्रतिरोध प्रोटीन का अनुमान लगाना

  4. 4

    मरीज़ के ट्यूमर ऑर्गेनॉइड पर दवाओं की जांच करना

  5. 5

    व्यक्तिगत दवा विकल्पों की पहचान करना

सभी कैंसर कोशिकाएं दवाओं पर एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं देतीं, जिससे सही ट्यूमर के लिए सही इलाज चुनना मुश्किल हो जाता है। प्रोटीनटॉक्स नाम का एक नया एआई टूल दवा देने के बाद कैंसर कोशिका के प्रोटीन में समय के साथ आने वाले बदलावों को ट्रैक करता है, और उसी पैटर्न से अनुमान लगाता है कि दवा असर करेगी या नहीं। रूई सन के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन को नेचर पत्रिका में प्रकाशित किया गया; प्रोटीनटॉक्स एक एआई 'वर्चुअल सेल' की तरह काम करता है — यानी किसी जीवित कोशिका के व्यवहार का कंप्यूटर पर बनाया गया अनुकरण।

टीम ने 18 स्तन कैंसर कोशिका श्रृंखलाओं पर, FDA नामक अमेरिकी दवा नियामक संस्था से मंज़ूरी प्राप्त 63 कैंसर-रोधी दवाओं और 59 दो-दवा संयोजनों का इस्तेमाल कर, 5,585 प्रोटीन से जुड़े 38 मिलियन से अधिक प्रोटीन माप एकत्र किए। दवा देने से पहले और फिर 6, 24 और 48 घंटे बाद प्रोटीन स्तर तथा कोशिका जीवित रहने की दर मापी गई। इसी समय-आधारित डेटा ने प्रोटीनटॉक्स को यह सीखने में मदद की कि दवा असर करते समय प्रोटीन स्तर कैसे बदलते हैं — जबकि ज़्यादातर एआई मॉडल कोशिका व्यवहार को एक ही पल की तस्वीर की तरह देखते हैं।

जीन गतिविधि पर आधारित मौजूदा एआई मॉडलों और पारंपरिक मशीन-लर्निंग तरीकों से प्रोटीनटॉक्स बेहतर साबित हुआ। प्रशिक्षण के दौरान कभी न देखे गए 81 कैंसर-रोधी यौगिकों पर इसने सटीक भविष्यवाणी की। इसने ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर — हार्मोन रिसेप्टर न होने के कारण जिसका इलाज मुश्किल माना जाता है — के खिलाफ अकेले से ज़्यादा असरदार साबित होने वाले 4 दवा जोड़े भी खोजे। सिर्फ़ स्तन कैंसर कोशिका श्रृंखलाओं पर प्रशिक्षित होने के बावजूद, इसने फेफड़े, बड़ी आंत, अग्न्याशय और मेलानोमा कैंसर कोशिकाओं की प्रतिक्रिया का भी सही अनुमान लगाया।

इन प्रोटीन बदलावों को ट्रैक कर मॉडल ने AKR1C3 नामक प्रोटीन को दवा प्रतिरोध का एक अहम कारण भी पाया. इस प्रोटीन को दबाने पर कैंसर कोशिकाओं में कीमोथेरेपी दवा डोसेटैक्सेल के प्रति संवेदनशीलता फिर से लौट आई, जिसकी पुष्टि प्रयोगशाला की कोशिका-नाशक जांच से हुई। टीम ने 501 ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर ट्यूमर के प्रोटीन पैटर्न का भी विश्लेषण किया और मरीज़ों को दोबारा बीमारी लौटने के जोखिम व दीर्घकालिक जीवित रहने की संभावना के आधार पर समूहों में बांटा।

मरीज़ के ऊतक से उगाए गए छोटे ट्यूमर, यानी ऑर्गेनॉइड, पर प्रोटीनटॉक्स ने 3,000 से अधिक पुनर्प्रयोजित दवाओं की जांच की। इसने ऐसे व्यक्तिगत दवा विकल्प खोजे जो सामान्य कीमोथेरेपी से कहीं कम खुराक में कैंसर कोशिकाओं को खत्म कर सकते हैं। साथ ही, इसने नए तालमेल से काम करने वाले दवा संयोजन भी खोजे।

शब्दों की व्याख्या

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