AI-चालित 'स्मार्ट' सैन्य रेडियो को नाकाम करने के लिए जैमर बना रहा है DRDO
पहचान और जैमिंग से बचने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस्तेमाल करने वाले कॉग्निटिव रेडियो नेटवर्क को नाकाम करने के लिए भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन एक वाहन-आधारित जैमिंग सिस्टम बना रहा है।
'स्मार्ट' यानी कॉग्निटिव रेडियो नेटवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर पहचान और जैमिंग से बच जाते हैं। इन्हें नाकाम करने के लिए भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) स्मार्ट कम्युनिकेशन जैमर सिस्टम (SCJS) नाम का एक उन्नत सिस्टम विकसित कर रहा है।
कॉग्निटिव रेडियो और मोबाइल एडहॉक नेटवर्क (MANET) उन्नत वायरलेस संचार प्रणालियां हैं, जो अपने आसपास के माहौल को भांपकर रेडियो स्पेक्ट्रम का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए खुद ही अपनी सेटिंग बदल लेती हैं। ये लगातार खाली या कम इस्तेमाल हो रहे फ्रीक्वेंसी चैनल खोजती रहती हैं और तेज़ी से उनमें बदलती रहती हैं, जिससे पारंपरिक जैमिंग सिस्टम से इन्हें पकड़ना या रोकना मुश्किल हो जाता है।
SCJS एक बड़ा वाहन-आधारित प्लेटफॉर्म होगा, जो सामरिक MANET नेटवर्क का पता लगाने, उनका विश्लेषण करने, वर्गीकरण करने, दिशा खोजने, निगरानी करने और उन्हें जाम करने में सक्षम होगा। डीआरडीओ की आवश्यकताओं के अनुसार, इस सिस्टम को 30 मेगाहर्ट्ज़ से 6,000 मेगाहर्ट्ज़ के फ्रीक्वेंसी दायरे में रेडियो की निगरानी और जैमिंग करनी होगी। इसमें 360 डिग्री पहचान क्षमता और 20 किलोमीटर की रेंज होनी चाहिए। इसे ऐसे रेडियो का भी सामना करना होगा जो प्रति सेकंड 2,000 बार तक फ्रीक्वेंसी बदल सकते हैं। यह विस्तृत फ्रीक्वेंसी दायरा ड्रोन, लॉइटरिंग मिसाइल और सॉफ्टवेयर-नियंत्रित रेडियो सहित आधुनिक सैन्य प्रणालियों के कई सामरिक संचार बैंड को कवर करता है।
डीआरडीओ की एक इकाई, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला, इस परियोजना को पूरा करने वाली मुख्य एजेंसी है, और यह डिज़ाइन तथा विकास के लिए भारतीय उद्योग भागीदारों की तलाश कर रही है।
कॉग्निटिव रेडियो नेटवर्क के नागरिक इस्तेमाल भी हैं, जिनमें स्पेक्ट्रम की भीड़भाड़ कम करना और वायरलेस संचार की दक्षता बढ़ाना शामिल है।
शब्दों की व्याख्या
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