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माइक्रोवेव-हथियार परीक्षण प्रणाली बनाने के लिए उद्योग भागीदार तलाश रहा DRDO

उच्च-शक्ति माइक्रोवेव विकिरण इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को कैसे प्रभावित करता है, यह परखने के लिए ड्रोन पर लगाई जा सकने वाली प्रणाली SHIELD का प्रस्ताव भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने जारी किया है। इसमें स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड एम्प्लीफायर…

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने SHIELD नाम से एक उन्नत S-बैंड उच्च-शक्ति माइक्रोवेव एकीकृत मूल्यांकन प्रणाली (लीथैलिटी और डैमेज के लिए) का प्रस्ताव जारी किया है। यह डायरेक्टेड-एनर्जी तकनीक क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताएं बनाने की भारत की कोशिशों में एक और कदम है। उद्योग-नेतृत्व वाले नवाचार को समर्थन देकर स्वदेशी रक्षा तकनीक विकास में तेज़ी लाने वाली टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड योजना के तहत यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

SHIELD के ज़रिए DRDO एक ऐसा मूल्यांकन प्लेटफॉर्म बनाना चाहता है, जो इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों पर उच्च-शक्ति माइक्रोवेव विकिरण के असर का अध्ययन कर सके। प्रस्तावित प्रणाली का ढांचा मॉड्यूलर और स्केलेबल होगा। इसके फार फील्ड में कम से कम 3 kV/m की चरम विद्युत क्षेत्र ताकत हासिल करने की उम्मीद है। इससे S-बैंड उच्च-शक्ति माइक्रोवेव विकिरण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कैसे प्रभावित करता है, इसका नियंत्रित मूल्यांकन संभव होगा। यह लचीले ड्यूटी साइकल के साथ पल्स मोड में काम करने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है, ताकि परीक्षण के दौरान अलग-अलग विद्युत-चुंबकीय एक्सपोज़र स्थितियों की नकल की जा सके।

प्रस्तावित प्रणाली का एक अहम हिस्सा गैलियम नाइट्राइड आधारित सॉलिड स्टेट पावर एम्प्लीफायर (GaN-SSPA) तकनीक है, जिसका इस्तेमाल उच्च-आवृत्ति, उच्च-शक्ति इलेक्ट्रॉनिक्स में इसकी क्षमता और पावर घनत्व के लिए बढ़ता जा रहा है। SHIELD की संरचना में यह तकनीक उच्च-शक्ति माइक्रोवेव सिग्नल पैदा करने में मदद करेगी, साथ ही ऐसी प्रणालियों से जुड़ी थर्मल और विश्वसनीयता चुनौतियों से भी निपटेगी। इसके लिए प्लेटफॉर्म में उन्नत थर्मल प्रबंधन समाधान भी शामिल किए गए हैं।

इस प्लेटफॉर्म का मुख्य मकसद इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के खिलाफ S-बैंड उच्च-शक्ति माइक्रोवेव विकिरण की लीथैलिटी और डैमेज क्षमता का आकलन और मापन करना है। इससे शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा के संपर्क में आने पर संचार उपकरण, सेंसर और नियंत्रण प्रणालियां कैसी प्रतिक्रिया देती हैं। यह परीक्षण ढांचा रक्षात्मक उपायों को विकसित करने में भी मदद करेगा, ताकि यह आंका जा सके कि भारत की अपनी संचार और सेंसर प्रणालियों को ऐसे एक्सपोज़र के प्रति ज़्यादा मज़बूत कैसे बनाया जा सकता है।

SHIELD की एक खास विशेषता इसकी ड्रोन पर लगाई जा सकने की क्षमता है, जिसका मकसद हवाई परीक्षण और प्रदर्शन संभव बनाना है। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड के ज़रिए चलाया जा रहा SHIELD कार्यक्रम, भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्टअप को उन्नत रक्षा तकनीक विकसित करने में भाग लेने का एक मौका देने का भी इरादा रखता है। यह आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी रक्षा विकास के लिए भारत की व्यापक कोशिश से मेल खाता है।

शब्दों की व्याख्या

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