IIT रुड़की की बिना बैटरी वाली स्मार्ट बैंडेज शरीर की गति से घाव भरती है
IIT रुड़की और INST मोहाली द्वारा विकसित 3D-MIDAS बैंडेज शरीर की गति की ऊर्जा को बिजली की उत्तेजना में बदलकर घाव भरने की गति तेज़ करती है, बिना बैटरी या तार के।
चरण दर चरण
- 1
शरीर की गति बैंडेज को खींचती है
- 2
यांत्रिक ऊर्जा बिजली के संकेत में बदलती है
- 3
संकेत घाव को ठीक होने के लिए उत्तेजित करता है
- 4
नई रक्त वाहिकाओं के साथ घाव तेज़ी से भरता है
IIT रुड़की के शोधकर्ताओं ने मोहाली स्थित नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान (INST) के साथ मिलकर एक स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज विकसित की है। यह बैंडेज शरीर की प्राकृतिक गतिविधियों से खुद बिजली के संकेत उत्पन्न करती है, जिसके लिए बैटरी, तार या किसी बाहरी बिजली स्रोत की ज़रूरत नहीं है। नाम की इस तकनीक का वर्णन नैनो एनर्जी पत्रिका में किया गया है।
कोई घाव त्वचा की प्राकृतिक बिजली-संकेत प्रणाली को बिगाड़ देता है, जिससे कोशिकाओं की मरम्मत में बाधा आ सकती है। 3D-MIDAS को इसी समस्या को हल करने के लिए बनाया गया है। एक लचीले, बहुत अधिक खिंचने वाले ढांचे से बनी यह पट्टी अपनी मूल लंबाई से लगभग 800 प्रतिशत तक खिंच सकती है। यह शरीर की गति और खिंचाव की यांत्रिक ऊर्जा को घाव के लिए बिजली की उत्तेजना में बदल देती है। यह घाव से रिसने वाले तरल पदार्थ को भी संभालती है और हवा के आने-जाने में मदद करती है।
प्रयोगशाला परीक्षणों में, बिना उपचार वाली स्थिति की तुलना में इस बैंडेज ने लगभग तीन गुना अधिक कोशिका वृद्धि और 2.5 गुना अधिक कोशिका गति उत्पन्न की। पशु अध्ययनों में, 13 से 15 दिनों के भीतर घाव के क्षेत्र का 90-95 प्रतिशत भर गया, और नई रक्त वाहिकाओं के बनने तथा कोलेजन जमा होने में भी सुधार देखा गया। आज़ादी से घूमने वाले चूहों पर हुए परीक्षणों में बैंडेज ने बिना किसी बाहरी यांत्रिक उत्तेजना के, सामान्य गति के दौरान ही निरंतर बिजली उत्पन्न की। इसका प्रदर्शन 500 खिंचाव चक्रों और तीन महीने तक स्थिर रहा।
IIT रुड़की के निदेशक प्रोफेसर के.के. पंत ने इस शोध को उन्नत सामग्री और अंतर-विषयी शोध के ज़रिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती हल करने का प्रयास बताया। मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर कौशिक परिदा ने कहा कि यह तकनीक बाहरी बिजली स्रोतों पर निर्भर मौजूदा बिजली-आधारित घाव-उपचार प्रणालियों की सीमाओं को दूर करने के लिए बनाई गई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इंसानों पर इस्तेमाल से पहले क्लिनिकल परीक्षण ज़रूरी होंगे, और यह भविष्य में दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाओं, आपात स्थितियों और कठिन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है।
शब्दों की व्याख्या
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- IIT रुड़की की बिना बैटरी वाली स्मार्ट बैंडेज शरीर की गति से घाव भरती है
