इसरो अब प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा, निर्माण उद्योग के हवाले
इसरो अनुसंधान और बड़े मिशनों पर ध्यान देगा, जबकि रॉकेट और सामान्य उपग्रहों का निर्माण निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां संभालेंगी — यह भारत की अंतरिक्ष नियामक संस्था ने कहा।
इसरो यह बदल रहा है कि वह खुद क्या बनाएगा। संस्था अनुसंधान, विकास और बड़े मिशनों पर ध्यान देगी, जबकि प्रक्षेपण यानों और सामान्य उपग्रहों का निर्माण निजी कंपनियों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के पास चला जाएगा।
"इसरो कोई प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा। वह सब निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम करेंगे," भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र के अध्यक्ष पवन गोयनका ने एक मीडिया सम्मेलन में कहा।
यह बदलाव भारी मिशन सूची के साथ आया है। अगले साल मानवयुक्त कक्षीय अंतरिक्ष यान, 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, और 2040 तक चांद पर भारतीय के उतरने की योजना है। भारत में इस समय करीब 450 अंतरिक्ष स्टार्टअप हैं। अंतरिक्ष संपत्तियों को बनाना, परखना, प्रक्षेपित करना और निगरानी करना अपस्ट्रीम कहलाता है; उपग्रहों पर टिकी सेवाएं और उपकरण डाउनस्ट्रीम।
उद्योग जगत ने इसे स्वाभाविक अगला कदम बताया। "इसरो अनुसंधान और अग्रणी तकनीक में और आगे बढ़ेगा, जबकि हमारे जैसी निजी कंपनियां निर्माण और परिचालन का बड़ा हिस्सा संभालेंगी," अग्निकुल कॉसमॉस के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी मोइन एसपीएम ने कहा। उन्होंने जोड़ा कि ऐसे हस्तांतरण के साथ स्पष्ट नियामक निगरानी और सुरक्षा जांच होनी चाहिए, और अहम बौद्धिक संपदा तथा विनिर्माण क्षमता भारत में ही रहनी चाहिए।
निजी कंपनियों की हालिया उड़ानों ने दिखाया है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर की क्षमता बना सकती हैं — यह भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट ने कहा। उनके मुताबिक यह कदम बताता है कि भारतीय अंतरिक्ष कंपनियां नवाचार से आगे बढ़कर क्रियान्वयन और पैमाने तक जा सकती हैं।
शब्दों की व्याख्या
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