चांद देखकर पली सपनों की उड़ान: इसरो की पहली महिला उपग्रह परियोजना निदेशक
1969 में हुई चांद यात्रा से प्रेरित टी.के. अनुराधा ने जीसैट-12 के लिए नई कक्षा-नियंत्रण तकनीक विकसित करने में मदद की और इसरो की पहली महिला उपग्रह परियोजना निदेशक बनीं।
चरण दर चरण
- 1
पीएसएलवी-सी17 से जीसैट-12 प्रक्षेपित (2011)
- 2
उपग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षा में प्रवेश करता है
- 3
समयबद्ध चरण कक्षा को ऊपर उठाते हैं
- 4
उपग्रह भू-स्थिर स्थिति तक पहुंचता है
- 5
एंटीना सफलतापूर्वक खुलता है
2011 में भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक टी.के. अनुराधा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के जीसैट-12 मिशन की परियोजना निदेशक थीं। उस समय उन्होंने एक भू-तुल्यकाली उपग्रह को उसकी अंतिम कक्षा में स्थापित करने के दौरान उसे नियंत्रित करने की एक नई विधि विकसित करने और लागू करने में मदद की। इस तकनीक ने मिशन को सफल बनाया और तब से यह उपग्रह संचालन में लगातार इस्तेमाल होती आ रही है।
1960 में जन्मी अनुराधा शिवमोग्गा और बेंगलुरु के बीच तीन बहनों के साथ पली-बढ़ीं। संस्कृत के प्रोफेसर उनके पिता शिक्षा को बहुत महत्व देते थे। 1969 में उन्होंने अपोलो 11 मिशन को इंसानों को चांद पर ले जाते देखा, और इस मिशन ने उन्हें एहसास कराया कि अंतरिक्ष एक ऐसा क्षेत्र है जिसका वे भी कभी हिस्सा बन सकती हैं। उन्होंने बेंगलुरु के यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और विश्वविद्यालय में टॉपर रहीं। तीन साल बाद वे इसरो से जुड़ गईं।
अनुराधा ने 1982 में इसरो में अपना करियर शुरू किया, जहां उन्होंने उपग्रह परीक्षण, इंटरफ़ेस और यह आंकने वाली प्रणालियों पर काम किया कि अलग-अलग मिशन परिस्थितियों में अंतरिक्ष यान कैसा प्रदर्शन करता है। यह अनुभव जीसैट-12 के लिए बहुत काम आया। जुलाई 2011 में पीएसएलवी-सी17 रॉकेट से इस संचार उपग्रह के प्रक्षेपण के बाद इसे एक अत्यधिक दीर्घवृत्ताकार कक्षा में रखा गया था। भूमध्य रेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर स्थित अपनी तय भू-स्थिर कक्षा तक पहुंचने के लिए इसे सावधानी से समयबद्ध चरणों में आगे बढ़ाना था। पहला चरण सबसे मुश्किल था, क्योंकि पृथ्वी के सबसे नज़दीक होने पर उपग्रह सबसे तेज़ गति से चलता है। इससे इंजीनियरों के पास ईंधन बचाते हुए इंजन चलाने के लिए बहुत ही कम समय बचता था। इसी समस्या को हल करने में अनुराधा की नई नियंत्रण विधि ने मदद की।
कर्नाटक के हासन में स्थित इसरो के मुख्य नियंत्रण केंद्र में अनुराधा ने मिशन निदेशक प्रमोदा हेगड़े और संचालन निदेशक के.एस. अनुराधा के साथ मिलकर एक पूरी तरह महिला टीम का नेतृत्व किया, जिसने जीसैट-12 के अहम चरणों की निगरानी की। जब उपग्रह का एंटीना सफलतापूर्वक खुला, तो नियंत्रण कक्ष तालियों से गूंज उठा। अनुराधा ने अपने काम किए हुए उपग्रह को पहला क़दम बढ़ाते देखने के एहसास को "बच्चे को जन्म देने जैसा" बताया।
आगे चलकर अनुराधा इसरो की पहली महिला उपग्रह परियोजना निदेशक बनीं। 38 साल के करियर में उन्होंने जीसैट-10 सहित कई संचार, दूर संवेदन और नेविगेशन कार्यक्रमों पर काम किया।
शब्दों की व्याख्या
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