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बोसॉन और फर्मियॉन मिलकर बना सकते हैं पदार्थ की नई अवस्था?

मोनाश विश्वविद्यालय के भौतिकविदों ने सैद्धांतिक रूप से बताया है कि दो बिल्कुल अलग तरह के क्वांटम कण, बोसॉन और फर्मियॉन, मिलकर एक स्थिर 'क्वांटम ड्रॉपलेट' नामक पदार्थ की नई अवस्था बना सकते हैं। इसे मौजूदा अल्ट्राकोल्ड परमाणु प्रयोगों से परखा जा सकता है।

भौतिकविदों ने सैद्धांतिक रूप से भविष्यवाणी की है कि दो बिल्कुल अलग तरह के क्वांटम कण — बोसॉन और फर्मियॉन — अत्यधिक, प्रबल अंतःक्रिया वाली परिस्थितियों में मिलकर पदार्थ की एक स्थिर बूंद बना सकते हैं। मोनाश विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज उस पुरानी धारणा को चुनौती देती है, जिसके अनुसार प्रबल रूप से अंतःक्रिया करने वाले बोस-फर्मी मिश्रणों में स्थिर बूंदें बनना मुश्किल माना जाता था।

बोसॉन और फर्मियॉन क्वांटम कणों की दो बुनियादी श्रेणियां हैं। नए शोध से पता चलता है कि इन दोनों का प्रबल रूप से अंतःक्रिया करने वाला मिश्रण भी आपस में बंधा रह सकता है, जिसे 'क्वांटम ड्रॉपलेट' कहा गया है। सामान्य तरल बूंद के उलट, यह इसलिए टिकी रहती है क्योंकि कणों के बीच के आकर्षण को फर्मियॉन द्वारा उत्पन्न दबाव संतुलित करता है, जिससे यह प्रणाली बिखरने से बच जाती है। मोनाश विश्वविद्यालय के भौतिकी एवं खगोलशास्त्र विभाग में पीएचडी कर रहे और इस शोध के मुख्य लेखक सैम फॉस्टर ने कहा, 'क्वांटम प्रणालियां हमारी रोज़मर्रा की दुनिया में असंभव लगने वाले तरीकों से व्यवहार कर सकती हैं। हमने दिखाया है कि ये दो बिल्कुल अलग तरह के कण एक-दूसरे को इस तरह संतुलित कर सकते हैं कि एक स्थिर बूंद बन जाए, जो खुद को खुद ही बांधे रखती है।'

फॉस्टर ने बताया कि पुराने सिद्धांत इन प्रणालियों को तभी समझा पाते थे जब कण अपेक्षाकृत कमज़ोर ढंग से अंतःक्रिया करते थे। उन्होंने कहा, 'हमारा नया तरीका यह पता लगाने में मदद करता है कि जब यह अंतःक्रिया बहुत ज़्यादा मज़बूत हो जाए तो क्या होता है, और यहीं सबसे दिलचस्प भौतिकी सामने आती है'। टीम को तरल से गैस में बदलने जैसी क्वांटम अवस्था के संकेत भी मिले, जो बताते हैं कि यह प्रणाली केवल बूंदों के अलावा और भी व्यापक तथा जटिल क्वांटम अवस्थाओं को सहारा दे सकती है। फॉस्टर ने आगे कहा कि अत्यधिक क्वांटम परिस्थितियों में पदार्थ खुद को किस तरह व्यवस्थित करता है, यह समझना क्वांटम प्रणालियों को डिज़ाइन करने और नियंत्रित करने के नए तरीके देता है।

गणनाओं के अनुसार इन बूंदों को मौजूदा अल्ट्राकोल्ड परमाणु प्रयोगों की मदद से बनाया जा सकता है, जिससे इसकी प्रयोगात्मक पुष्टि अगला व्यावहारिक कदम बन जाती है। सैम फॉस्टर, ओलिवियर ब्लू, जेस्पर लेविनसेन और मीरा एम. पैरिश द्वारा लिखा गया यह शोधपत्र 14 अगस्त 2026 को फिज़िकल रिव्यू लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ।

शब्दों की व्याख्या

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