रोबोट सहायता से घुटना प्रत्यारोपण अधिक सटीक, पर मरीज़ों को एक साल में कोई अतिरिक्त फ़ायदा नहीं: अध्ययन
रोबोट-सहायता प्राप्त घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी अधिक सटीक होती है। लेकिन एक साल बाद दर्द, गतिशीलता और रिकवरी में यह पारंपरिक सर्जरी से बेहतर नहीं पाई गई — यह जानकारी अब तक के सबसे बड़े परीक्षण रेसर-नी के नतीजों में सामने आई है।
रोबोट-सहायता प्राप्त घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी बिना रोबोट सहायता वाली सर्जरी की तुलना में कृत्रिम जोड़ को अधिक सटीकता से लगा सकती है। लेकिन यह अतिरिक्त सटीकता पहले साल में मरीज़ों के लिए बेहतर नतीजों में तब्दील नहीं हुई। यह बात अब तक के सबसे बड़े यादृच्छिक परीक्षण रेसर-नी के नतीजों से सामने आई है। वारविक विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स कोवेंट्री एंड वारविकशायर एनएचएस ट्रस्ट द्वारा समन्वित इस परीक्षण के नतीजे द लांसेट पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
ब्रिटेन में लगभग 6% घुटना प्रत्यारोपण रोबोट सहायता से किए जाते हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 16% और ऑस्ट्रेलिया में 42% है। इस ब्रिटेन-व्यापी परीक्षण को राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं देखभाल अनुसंधान संस्थान (NIHR) ने, रोबोट प्रणाली बनाने वाली कंपनी स्ट्राइकर के साथ मिलकर वित्त-पोषित किया। इसने पारंपरिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की तुलना, दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली रोबोट प्रणाली स्ट्राइकर माको से की गई सर्जरी से की।
ब्रिटेन के 10 अस्पतालों में 33 सर्जनों द्वारा 339 मरीज़ों का इलाज इस परीक्षण में शामिल था। सर्जरी के एक साल बाद, रोबोट और पारंपरिक — दोनों समूहों में रिकवरी, गतिशीलता और दर्द का स्तर लगभग समान रहा। मरीज़ अपने कृत्रिम जोड़ को रोज़मर्रा की गतिविधियों में कितना महसूस करते हैं, इसे मापने वाले मुख्य पैमाने 'फ़ॉरगॉटन जॉइंट स्कोर' पर दोनों समूहों के बीच कोई सार्थक अंतर नहीं मिला। चलने की क्षमता, पहले तीन महीनों और 12 महीनों में दर्द, अस्पताल में रहते हुए दर्द, और दोबारा सर्जरी की ज़रूरत पड़ने की संभावना में भी नतीजे समान रहे। गंभीर दुष्प्रभाव रोबोट सर्जरी में अधिक नहीं पाए गए, जिससे पता चलता है कि यह तरीका पारंपरिक इलाज जितना ही सुरक्षित है।
वारविक मेडिकल स्कूल के प्रोफ़ेसर और परीक्षण के मुख्य अन्वेषक एंड्रयू मेटकाफ़ ने कहा, 'यह तकनीक मरीज़ों की देखभाल में वाकई मदद कर सकती है। लेकिन रोबोट-सहायता प्राप्त घुटना प्रत्यारोपण में कम दर्द या बेहतर गति जैसे फ़ायदे देखने से पहले अभी और काम करना बाक़ी है'। रॉयल ऑर्थोपेडिक अस्पताल के सलाहकार सर्जन एडवर्ड डेविस ने कहा कि यह परीक्षण दिखाता है कि रोबोट सहायता अधिक सटीकता देती है। सैद्धांतिक रूप से यह सर्जनों को मरीज़ की शारीरिक संरचना के अनुसार प्रक्रिया को अनुकूलित करने देती है। लेकिन उस सटीकता को फ़ायदे में बदलने से पहले आदर्श जोड़-स्थिति की और समझ ज़रूरी है, उन्होंने कहा।
रोबोट-सहायता प्राप्त सर्जरी में पारंपरिक सर्जरी की तुलना में औसतन 10.5 मिनट अधिक समय लगा और लागत लगभग £950 ज़्यादा रही। शोधकर्ता यह जानने के लिए प्रतिभागियों की अगले 10 वर्षों तक निगरानी जारी रखेंगे कि क्या लंबे समय में दोनों तरीक़ों के बीच कोई सार्थक अंतर सामने आता है। इसमें यह भी शामिल है कि क्या किसी एक तरीक़े से दोबारा घुटने की सर्जरी की ज़रूरत पड़ने की संभावना कम होती है।
