परमाणु कचरे को 'सोने' में बदलने की नई प्रक्रिया: अमेरिकी टीम की पहल
अमेरिका में जमा लगभग 94,000 टन परमाणु कचरे से मूल्यवान आइसोटोप और ईंधन तेज़ी से निकालने वाली नई रासायनिक पृथक्करण तकनीक REDUCE परियोजना के तहत विकसित की जा रही है।
चरण दर चरण
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खर्च हो चुका ईंधन नाइट्रिक एसिड में घोला जाता है
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PaCERS सेंट्रीफ्यूज सेकंडों में तत्व अलग करते हैं
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मूल्यवान आइसोटोप, ईंधन पुनर्प्राप्त होते हैं
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बचा कचरा अल्पजीवी तत्वों में बदला जाता है
1970 के दशक में परमाणु ईंधन पुनर्संसाधन और ब्रीडर रिएक्टरों को छोड़ने के बाद से अमेरिका में लगभग 94,000 टन उच्च-स्तरीय परमाणु कचरा जमा है, जिसका अधिकांश हिस्सा अब तक पुनर्संसाधित नहीं हुआ है। इस कचरे को सिर्फ दफनाने के बजाय इसकी वैल्यू वापस पाने के लिए शाइन टेक्नोलॉजीज (SHINE Technologies), आर्गोन नेशनल लेबोरेटरी और केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता अमेरिकी ऊर्जा विभाग के तहत एक नई प्रक्रिया विकसित कर रहे हैं।
खर्च हो चुके परमाणु ईंधन में इसके मूल यूरेनियम और प्लूटोनियम का करीब 90% हिस्सा अब भी मौजूद है, साथ ही स्ट्रॉन्शियम-90, रोडियम-103 और पैलेडियम-105-110 जैसे आइसोटोप भी हैं, जिनके चिकित्सा, औद्योगिक और अंतरिक्ष संबंधी उपयोग हैं। टीम का अनुमान है कि अकेले ये आइसोटोप लगभग 24 अरब डॉलर मूल्य के हैं, जबकि पुनर्प्राप्त किया जा सकने वाला यूरेनियम-प्लूटोनियम ईंधन इससे कहीं अधिक मूल्यवान है।
रिकवर एलिमेंट्स – डिस्ट्रॉय अनडिजायरेबल्स – क्रिएट एनर्जी (Recover Elements – Destroy Undesirables – Create Energy, REDUCE) नाम की इस परियोजना का मकसद परमाणु कचरे को उसके घटक तत्वों में अलग करने वाली रासायनिक प्रक्रिया को तेज़ करना है। PUREX जैसी पारंपरिक पृथक्करण विधियां गुरुत्वाकर्षण से चलने वाले लंबे स्तंभों पर निर्भर करती हैं, जिनमें तत्वों को अलग करने में घंटों लगते हैं और अल्प-अर्धायु वाले आइसोटोप गंवाने का खतरा भी रहता है। इसके बजाय REDUCE, 'पैक्ड सेंट्रीफ्यूगल इक्विपमेंट फॉर रेडियोकेमिकल सेपरेशन' (Packed Centrifugal Equipment for Radiochemical Separation, PaCERS) नामक सेंट्रीफ्यूज उपकरण का इस्तेमाल करता है, जो घुले हुए ईंधन को गुरुत्वाकर्षण बल से 1,000 गुना से भी अधिक तेज़ी से घुमाकर पृथक्करण को कुछ ही सेकंडों में पूरा कर देता है; इससे जरूरी संयंत्र का आकार भी छोटा हो जाता है।
टीम के अनुसार, जिन सामग्रियों का व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पुनर्चक्रण नहीं हो सकता, उन्हें भविष्य के विखंडन रिएक्टरों से निकलने वाले न्यूट्रॉन से बमबारी कर ऐसे कम-अर्धायु वाले तत्वों में बदला जा सकता है जो दशकों, वर्षों या यहां तक कि मिनटों में ही क्षय हो जाते हैं, जबकि पहले इसके लिए 1,00,000 साल से अधिक समय तक दफन रखने की जरूरत होती थी।
शाइन टेक्नोलॉजीज पहले से ही रेडियोधर्मी सामग्रियों को अलग कर आज चिकित्सा आइसोटोप बना रही है, और उसी विशेषज्ञता का इस्तेमाल PaCERS तकनीक को व्यावहारिक इस्तेमाल के करीब लाने में किया जा रहा है, कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी रॉस रेडल ने बताया।
