पौधों के कठोर कचरे लिग्निन को रसायनों में बदलता नया कैटेलिस्ट.
शोधकर्ताओं ने एक बेहद प्रभावी सिंगल-एटम रुथेनियम कैटेलिस्ट विकसित किया है, जो पौधों के कठोर अपशिष्ट पॉलिमर लिग्निन को हल्की परिस्थितियों में फिनॉल जैसे मूल्यवान रसायनों में बदल देता है।
चरण दर चरण
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कैटेलिस्ट ऑक्सीजन को सक्रिय करता है.
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क्रियाशील कण लिग्निन पर हमला करते हैं.
- 3
कार्बन-ऑक्सीजन और कार्बन-कार्बन बंध टूटते हैं.
- 4
लिग्निन छोटे अणुओं में बंट जाता है.
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छोटे अणु फिनॉल जैसे रसायन बनाते हैं.
लिग्निन पौधों को उनकी संरचनात्मक मजबूती देने में अहम भूमिका निभाता है और प्रकृति में पाए जाने वाले एरोमैटिक यौगिकों का सबसे बड़ा नवीकरणीय स्रोत भी है। कृषि और वानिकी से निकलने वाले अपशिष्ट बायोमास में लिग्निन की हिस्सेदारी 35% तक हो सकती है। लेकिन लिग्निन की जटिल आणविक संरचना के कारण इसे कुशलता से तोड़ना बेहद मुश्किल रहा है, जिसने टिकाऊ विनिर्माण में इसके इस्तेमाल को सीमित कर रखा है।
एसीएस कैटेलिसिस पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. क्रिस्टोफर पार्लेट, शिनयू झोउ और युताओ जियांग सहित एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक बेहद प्रभावी "सिंगल-एटम कैटेलिस्ट" विकसित किया। यह कैटेलिस्ट लिग्निन को जोड़े रखने वाले मजबूत रासायनिक बंधों को कैसे तोड़ता है, इसे टीम ने आणविक स्तर पर समझा। यह कैटेलिस्ट नाइट्रोजन-युक्त कार्बन सामग्री के भीतर अलग-अलग रुथेनियम परमाणुओं को जड़ित करके बनाया गया है। रुथेनियम परमाणुओं को अलग-थलग रखने से यह बहुत कम मात्रा में धातु का इस्तेमाल करके भी मजबूत प्रदर्शन देता है, जिससे यह पारंपरिक कैटेलिस्ट प्रणालियों की तुलना में अधिक कारगर बनता है।
प्रयोगशाला प्रयोगों और कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग को मिलाकर शोधकर्ताओं ने पाया कि "Ru-N4 साइट" नाम की एक खास परमाणु संरचना खासतौर पर महत्वपूर्ण है। ये साइटें ऑक्सीजन के अणुओं को सक्रिय करती हैं, जिससे अत्यधिक क्रियाशील कण बनते हैं। ये कण फिर लिग्निन की संरचना पर हमला करते हैं और कार्बन-ऑक्सीजन तथा कार्बन-कार्बन, दोनों तरह के बंधों को तोड़कर लिग्निन को छोटे अणुओं में बदल देते हैं।
अनुकूलतम परिस्थितियों में जांचे जाने पर इस कैटेलिस्ट ने परीक्षण के लिए इस्तेमाल किए गए लगभग सभी मॉडल लिग्निन यौगिकों को बदल दिया और फिनॉल (phenol) समेत मूल्यवान उत्पाद अच्छी मात्रा में तैयार किए। यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत हल्की परिस्थितियों में ही काम करती है और इसमें कठोर रसायनों की जरूरत नहीं पड़ती। टीम ने इस कैटेलिस्ट को कई बायोमास स्रोतों से जुटाए गए असली लिग्निन पर भी आजमाया और उसे सफलतापूर्वक ऐसे उपयोगी एरोमैटिक यौगिकों में बदला, जो भविष्य में ईंधन, प्लास्टिक और अन्य सामग्रियों के लिए निर्माण-खंड बन सकते हैं। ये नतीजे यह विस्तार से बताते हैं कि बायोमास के रूपांतरण के दौरान सिंगल-एटम कैटेलिस्ट कैसे काम करते हैं. और शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तरीका पेट्रोलियम-आधारित उत्पादन से हटकर अधिक चक्रीय, बायोमास-आधारित रासायनिक उद्योग की ओर बदलाव में मदद कर सकता है।
"यह समझना कि ये कैटेलिस्ट परमाणु स्तर पर ठीक कैसे काम करते हैं, हमें नवीकरणीय संसाधनों को मूल्यवान रसायनों में बदलने के लिए बेहतर सामग्री डिजाइन करने में मदद करता है," केमिकल इंजीनियरिंग के व्याख्याता डॉ. क्रिस्टोफर पार्लेट ने कहा।
