मकड़ी के जाले से मिल रहा वन्यजीव सर्वेक्षण का नया डीएनए स्रोत
वैज्ञानिक मकड़ी के जालों — यहां तक कि नकली हैलोवीन जालों — से पर्यावरणीय डीएनए इकट्ठा कर रहे हैं। इससे आसपास रहने वाले जानवरों की पहचान बिना देखे ही हो जाती है।
चरण दर चरण
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जानवर आसपास डीएनए छोड़ते हैं
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मकड़ी के जाले वह डीएनए पकड़ते हैं
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वैज्ञानिक जाले से डीएनए जांचते हैं
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नकली जाले पुनः उपयोगी विकल्प देते हैं
किसी पारिस्थितिकी तंत्र में रहने वाले जीवों की गिनती संरक्षण कार्य के लिए बेहद ज़रूरी है। इससे जैव विविधता आंकने, प्रवास पर नज़र रखने और आक्रामक प्रजातियों का पता लगाने में मदद मिलती है। लेकिन जानवरों को देखकर या पकड़कर गिनने के पारंपरिक तरीके धीमे, महंगे और अधूरे होते हैं। पिछले एक दशक में शोधकर्ता पर्यावरणीय डीएनए यानी eDNA की ओर मुड़े हैं। यह वह आनुवंशिक सामग्री है जिसे जीव मल, मिट्टी, पानी और हवा में छोड़ जाते हैं। जानवर को देखे बिना ही इसे इकट्ठा कर जांचा जा सकता है।
शोधकर्ताओं ने अब एक अप्रत्याशित eDNA स्रोत खोजा है: मकड़ी के जाले। इनके चिपचिपे धागे उन्हें बुनने वाली मकड़ियों के अंश, उनके भोजन के टुकड़े, और आसपास के पौधों-जानवरों की लार व पराग को फँसा लेते हैं। "यह अब तक इस्तेमाल की गई सबसे अच्छी सामग्रियों में से एक है," ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में कर्टिन विश्वविद्यालय के आणविक पारिस्थितिकीविद् जोशुआ न्यूटन ने कहा। वे फूलों, नदियों, पेड़ों के खोखलों और चलती कारों के फ़िल्टर से भी नमूने लेकर जानवरों की आबादी का अध्ययन कर चुके हैं।
न्यूटन ने पर्थ के पास एक चिड़ियाघर और वन्यजीव अभयारण्य में मकड़ी के जालों से मिली जैव विविधता की तुलना पौधों से लिए स्वैब, पानी, मिट्टी और फ़िल्टर लगे पंखे से मिले नमूनों से की। पौधों के स्वैब में अधिक वन स्तनधारी मिले, पानी के नमूनों में अधिक मछलियां मिलीं। लेकिन रीढ़धारी प्रजातियों की पहचान में मकड़ी के जालों जितना असरदार कोई और निष्क्रिय तरीका नहीं निकला। फ्रांस में हुए एक ऐसे ही अध्ययन का नतीजा भी यही था। यह डेटा जुटाने के लिए करीब 40 जाले नष्ट करने पड़े। "यह उस चीज़ के खिलाफ़ जाता है जो हम करना चाहते हैं, अगर हम किसी जीव का घर ही उठा ले जाएं," न्यूटन ने कहा।
इसी चिंता ने न्यूज़ीलैंड के वाइकाटो विश्वविद्यालय की जीनोम वैज्ञानिक एंजेला मैकगॉरन को एक विकल्प आज़माने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हैलोवीन की दुकान से नकली जालों का एक थैला खरीदा। उन्हें हैंगरों पर लपेटकर बाहर टांग दिया। नकली जालों ने आसपास की गायों, भेड़ों और पास के एक पक्षीघर की विदेशी चिड़ियों का eDNA पकड़ लिया। असली जालों से भी बेहतर तरीके से इन्होंने फफूंद के बीजाणु पकड़े। यह खेतों को होने वाले खतरों पर नज़र रखने वाले पौध-रोग विशेषज्ञों के लिए उपयोगी है। नकली जाले हर जगह सस्ते और असरदार ढंग से eDNA इकट्ठा कर सकते हैं या नहीं, यह जानने के लिए उनकी टीम अब बड़े प्रयोग कर रही है।
शब्दों की व्याख्या
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