साइंस टेक पल्स
विज्ञान

हल्का ट्रैफिक शोर भी छीन लेता है चिड़ियों की चहचहाहट का सुकून

हल्का ट्रैफिक शोर भी पक्षियों की आवाज़ से मिलने वाले मानसिक सुकून को कम कर देता है, सरे विश्वविद्यालय के नए अध्ययन में पाया गया।

इंग्लैंड के सरे विश्वविद्यालय के एक नए अध्ययन में पाया गया है कि हल्का ट्रैफिक शोर भी पक्षियों की चहचहाहट से मिलने वाले मानसिक सुकून को कम कर देता है। पीपल एंड नेचर जर्नल में छपे इस अध्ययन में यह जांचा गया कि प्राकृतिक ध्वनियों की बनावट कल्याण को कैसे प्रभावित करती है। साथ ही यह भी देखा गया कि आसपास का ट्रैफिक शोर उन फायदों में कैसे बाधा डालता है।

शोधकर्ताओं ने पक्षियों की आवाज़ और ट्रैफिक शोर वाले एक जैसे नौ बनावटी साउंडस्केप इस्तेमाल कर दो अध्ययन किए, जिनमें ध्वनि जटिलता और तेज़ी के स्तर अलग-अलग थे। पहले अध्ययन में 1,500 से ज़्यादा लोगों ने आवाज़ें सुनने के बाद बताया कि वे कितना आराम और तरोताज़ा महसूस कर रहे थे। दूसरे अध्ययन में 63 लोगों ने दिल की धड़कन नापने वाला यंत्र पहनकर प्रयोगशाला में वही आवाज़ें सुनीं।

पक्षियों की आवाज़ वाले प्राकृतिक साउंडस्केप ने, उनकी ध्वनि बनावट चाहे जैसी भी हो, मानसिक कल्याण को बेहतर बनाया। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिन के समय के ट्रैफिक शोर दिशानिर्देश से भी कम स्तर पर होने के बावजूद, ट्रैफिक शोर ने इन फायदों को कम कर दिया। ट्रैफिक शोर मौजूद होने पर प्रतिभागियों की हृदय गति परिवर्तनशीलता काफी घट गई, जो ज़्यादा शारीरिक तनाव का संकेत है। जब साउंडस्केप खुद भी तेज़ या जटिल था, तो यह नकारात्मक असर और भी ज़्यादा था।

हर साउंडस्केप में सिर्फ तीन पक्षी प्रजातियां और पांच अलग आवाज़ें ही थीं, फिर भी जिन प्रतिभागियों को ज़्यादा प्रजाति विविधता महसूस हुई, उन्होंने ज़्यादा कल्याण की भावना बताई। शोधकर्ताओं का कहना है कि असली विविधता नहीं, बल्कि महसूस की गई विविधता ही अहम हो सकती है। युवा प्रतिभागियों और पक्षियों की ज़्यादा जानकारी रखने वालों ने भी ज़्यादा कल्याण महसूस किया। सरे विश्वविद्यालय की डॉ. मेलिसा मार्सेल और डॉ. एलिनॉर रैटक्लिफ का कहना है कि पार्कों के पास गति सीमा घटाना या ज़मीनी झाड़ियों को घना करना ट्रैफिक शोर के असर को कम करने में मदद कर सकता है।

शब्दों की व्याख्या

अब तक की कहानी

  1. दिल्ली के शोर को नक़्शे पर उतारने वाला नया सीएसआईआर मॉडल
  2. पक्षियों का गीत कानों को क्यों भाता है? जर्मन अध्ययन में खुलासा
  3. हल्का ट्रैफिक शोर भी छीन लेता है चिड़ियों की चहचहाहट का सुकून
#environmental psychology#birdsong#noise pollution#well-being#University of Surrey
इस खबर को रेटिंग दें

संबंधित खबरें