पुरुष और महिला अलग तरह से क्यों चलते हैं? निएंडरथल कूल्हे की हड्डी से जवाब
निएंडरथल नहीं, बल्कि आधुनिक पुरुष की कूल्हे की हड्डी ही विकास में असामान्य बदलाव है, तेल अवीव विश्वविद्यालय के अध्ययन में दावा।
पुरुष और महिलाएं अलग तरह से क्यों चलते हैं, इसका जवाब शायद तेल अवीव विश्वविद्यालय के एनाटॉमी और एंथ्रोपोलॉजी विभाग के एक नए अध्ययन में मिलता है। इसकी वजह निएंडरथल नहीं, बल्कि आधुनिक मानव पुरुष की कूल्हे की हड्डी में हुआ असामान्य विकासवादी बदलाव हो सकता है। प्रोफेसर योएल राक के नेतृत्व में हुए और साइंटिफिक रिपोर्ट्स में छपे इस अध्ययन में स्पेन, टेक्नियन, बार-इलान विश्वविद्यालय और ओनो अकादमिक कॉलेज के शोधकर्ता भी शामिल थे।
शोधकर्ताओं ने इज़राइल की केबारा गुफा और स्पेन के सिमा दे लॉस ह्युएसोस स्थल से मिली, लगभग पूरी दो नर निएंडरथल कूल्हे की हड्डियों की तुलना दर्जनों आधुनिक मानव कूल्हे की हड्डियों से की। बड़े और मज़बूत ढांचे के बावजूद, ज़्यादातर मापों में निएंडरथल नमूने आधुनिक पुरुष की तुलना में आधुनिक महिला की कूल्हे की हड्डी से ज़्यादा मिलते-जुलते थे। इससे लगता है कि निएंडरथल और आधुनिक महिलाओं ने पुरानी संरचना बनाए रखी, जबकि आधुनिक पुरुष की कूल्हे की हड्डी बदल गई।
मुख्य अंतर कूल्हे के जोड़ों की जगह में है; आधुनिक पुरुषों में ये महिलाओं या नर निएंडरथल की तुलना में कूल्हे की गोलाई में आगे की ओर स्थित हैं। हर कदम पर शरीर का गुरुत्व केंद्र नीचे जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस बदलाव से कूल्हे के अगले हिस्से से जुड़ी जांघ की मांसपेशियां एक स्प्रिंग की तरह ऊर्जा जमा करती हैं, और अगले कदम के लिए शरीर को ऊपर उठाने में मदद करती हैं। इससे लंबी दूरी चलने में ऊर्जा की खपत कम हो सकती है। इस बदलाव के लिए मोटी जघन हड्डी और कूल्हे का गहरा अगला हिस्सा भी ज़रूरी था।
प्रसव के लिए कूल्हे का अपेक्षाकृत उथला रहना और साथ ही चौड़ा जन्म मार्ग ज़रूरी है, इसलिए महिला कूल्हे की हड्डी में वही बदलाव नहीं आ सका और वह नर निएंडरथल जैसी पुरानी संरचना के करीब ही रह गई होगी। ओनो अकादमिक कॉलेज की प्रोफेसर एला बीन कहती हैं कि मानव विकास से जुड़े सवाल सिर्फ दूर के अतीत तक सीमित नहीं हैं। उनके मुताबिक, मानव चाल के विकास को समझना बायोमैकेनिक्स, हड्डी-मांसपेशी चिकित्सा, पुनर्वास और चोट रोकथाम के शोध में मदद कर सकता है।
शब्दों की व्याख्या
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