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टोक्यो विश्वविद्यालय ने खाद्य अपशिष्ट को कंक्रीट से बेहतर निर्माण सामग्री में बदला

शोधकर्ताओं ने पत्तागोभी और केले के छिलके जैसे सूखे, पिसे खाद्य अपशिष्ट को ठोस पैनलों में दबाया; सबसे अच्छे नमूने ने मोड़ने की ताकत में कंक्रीट मानक को पीछे छोड़ा, हालांकि यह एक शुरुआती, बिना समीक्षा वाला नमूना है।

चरण दर चरण

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    खाद्य अपशिष्ट काटकर सुखाया जाता है

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    सूखे अपशिष्ट को पीसकर पाउडर बनाया जाता है

  3. 3

    पाउडर को मिलाकर गर्मी में दबाया जाता है

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    यह ठंडा होकर ठोस खाद्य-आधारित पैनल बनता है

टोक्यो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने केले के छिलके, संतरे के छिलके, प्याज़ के छिलके, कद्दू के छिलके, पत्तागोभी और समुद्री शैवाल जैसे खाद्य अपशिष्ट को सुखाकर पीसा। फिर इस पाउडर को गर्मी में दबाकर उन्होंने ठोस निर्माण सामग्री के नमूने बनाए, जिसमें किसी पेट्रोलियम-आधारित रेज़िन का इस्तेमाल नहीं किया गया।

इस प्रक्रिया में चार चरण थे: खाद्य अपशिष्ट को काटकर सुखाना, पीसकर पाउडर बनाना, पानी या खाने योग्य मसालों के साथ मिलाना, और गर्म सांचे के अंदर दबाना। उन्होंने 60 से 180 डिग्री सेल्सियस तापमान और 6 से 50 मेगापास्कल दबाव आज़माए। सामान्य आधार स्तर 100 डिग्री, 50 मेगापास्कल और 10 मिनट था।

सबसे अच्छा नमूना चाइनीज़ पत्तागोभी से बना था; तीन-बिंदु मोड़ परीक्षण में इसने करीब 17.7 मेगापास्कल फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ हासिल की, यानी मुड़ने का प्रतिरोध। इसकी तुलना सामान्य कंक्रीट के लिए शोधकर्ताओं के 5 मेगापास्कल मानक से की गई। इस काम में कोटा माचिदा के साथ रहे मैटेरियल इंजीनियर युया साकाई ने इस ताकत की वजह बताई। उनके अनुसार खाद्य अपशिष्ट में मौजूद शर्करा गर्मी में नरम होकर पौधों के रेशों के बीच की जगह भर देती है, और ठंडा होने पर एक बंधन के रूप में सख्त हो जाती है।

2021 के मूल शोधपत्र ने इस नतीजे को कंक्रीट मानक से "तीन गुना से अधिक मज़बूत" बताया था; बाद में टोक्यो विश्वविद्यालय के एक लेख ने इस तुलना को गोल करके "चार गुना" बताया। अकेला कद्दू का छिलका कंक्रीट मानक तक नहीं पहुंचा। लेकिन उसमें 25 प्रतिशत चाइनीज़ पत्तागोभी मिलाने पर उसकी फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ करीब 10 मेगापास्कल तक बढ़ गई।

यह शोध पीयर-रिव्यू की गई संरचनात्मक स्टडी के बजाय एक कॉन्फ्रेंस पेपर और प्रीप्रिंट के रूप में प्रकाशित हुआ। सिर्फ फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ यह साबित नहीं करती कि यह सामग्री कंक्रीट की जगह ले सकती है, क्योंकि कंक्रीट को आमतौर पर मोड़ने के बजाय दबाव सहने की क्षमता के लिए महत्व दिया जाता है। शोधकर्ताओं ने बिना उपचारित नमूनों को खुद चखा; उन्होंने बताया कि कमरे के तापमान पर चार महीने बाद कोई दिखाई देने वाला फफूंद, सड़न या कीड़े नहीं मिले। लेकिन गीला होने पर ये नमूने अपनी ताकत खो देते हैं, और इन पर औपचारिक खाद्य-सुरक्षा परीक्षण नहीं हुआ है।

शब्दों की व्याख्या

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