इंसान की नकल करने वाले AI 'डिजिटल ट्विन' उसी को तोड़-मरोड़ते नजर आते हैं: अध्ययन
साइंस एडवांसेज में छपे एक अध्ययन में पाया गया है कि किसी खास व्यक्ति के सर्वे जवाबों का अनुमान लगाने के लिए बनाए गए AI सिस्टम औसतन करीब एक-चौथाई बार गलत होते हैं। ये लोगों के बीच असली अंतर को एक 'विकृत दर्पण' जैसी छवि में बदल देते हैं।
कुछ समाजशास्त्री महंगे और जल्दी थक जाने वाले मानव शोध प्रतिभागियों की जगह किसी खास व्यक्ति के संभावित जवाबों की नकल करने वाले AI 'डिजिटल ट्विन' इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन 2 सितंबर को साइंस एडवांसेज पत्रिका में छपे एक अध्ययन में पाया गया कि ये डिजिटल ट्विन असल में उन लोगों के विचारों को तोड़-मरोड़ते नजर आते हैं जिनकी वे नकल करते हैं। शोधकर्ता इसे 'फनहाउस मिरर' यानी विकृत दर्पण जैसा असर बताते हैं।
इन ट्विन को बनाने के लिए, कोलंबिया बिजनेस स्कूल के कंप्यूटेशनल समाजशास्त्री ओलिवियर तूबिया के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने अमेरिका भर के 2,000 से ज्यादा लोगों के एक डेटासेट का इस्तेमाल किया। इन लोगों ने उम्र, आय, शिक्षा, राजनीतिक झुकाव और व्यक्तित्व जैसी विशेषताओं पर 500 से ज्यादा सवालों के जवाब दिए थे। इसके अलावा, उन्होंने सोचने के तरीकों और पूर्वाग्रहों को परखने वाले टेस्ट भी पूरे किए थे। नए अध्ययन के लिए, टीम ने हर व्यक्ति के जवाबों को एक बड़े भाषा मॉडल (LLM) में डाला और उससे उसी व्यक्ति की तरह जवाब देने को कहा। इसके बाद, राजनीतिक दानदाताओं और एल्गोरिदम आधारित भर्ती जैसी 19 सामाजिक विज्ञान प्रयोगों में ट्विन के जवाबों की तुलना असली लोगों के जवाबों से की गई।
ये डिजिटल ट्विन महज़ संयोग से बेहतर साबित हुए, लेकिन औसतन करीब एक-चौथाई बार गलत रहे। यह सिर्फ जनसांख्यिकीय जानकारी वाले चैटबॉट के प्रदर्शन के करीब-करीब बराबर था। फिर भी ट्विन ने लोगों के बीच असली अंतर को बेहतर तरीके से पकड़ा। शोधकर्ताओं ने पाया कि ट्विन के जवाब असली लोगों के जवाबों से ज्यादा एक-जैसे थे और जनसांख्यिकीय रूढ़ियों की ओर झुके हुए थे। अमीर और ज्यादा पढ़े-लिखे प्रतिभागियों के लिए इनकी सटीकता बढ़ जाती थी। इनमें दूसरों पर ज्यादा भरोसा और तकनीकी खतरों को लेकर कम चिंता जैसे झुकाव भी दिखे। कुल मिलाकर ये उन असली लोगों से कहीं ज्यादा तार्किक नजर आए जिनकी वे नकल कर रहे थे। पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के AI शोधकर्ता और अर्थशास्त्री हादी हुसैनी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़े फैसले लेने वाले AI एजेंटों पर अपने शोध में भी उन्होंने ऐसा ही एक झुकाव देखा है।
तूबिया ने कहा कि ट्विन बनाने में इस्तेमाल हुआ स्थिर, एक-बार का सर्वे फॉर्मेट उनकी सीमाओं की एक वजह हो सकता है, और ज्यादा जटिल प्रशिक्षण तरीके मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जहां थके हुए इंसान सिर्फ एक वाक्य में जवाब देते हैं, वहां विस्तृत जवाब तैयार करने या प्रयोगों को पहले से परखने के लिए डिजिटल ट्विन अब भी उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन उन्होंने शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि सर्वे से मिले सिंथेटिक डेटा से मानव व्यवहार के बारे में असल में क्या अनुमान लगाया जा सकता है, इस बारे में यथार्थवादी बने रहें।
शब्दों की व्याख्या
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