कण के आकार से पता चला बेन्नू क्षुद्रग्रह की सतह इतनी कमज़ोर क्यों है
एक नए मॉडल से पता चलता है कि किसी ढीले क्षुद्रग्रह की मज़बूती उसके कणों के आकार और आकृति से पहले ही बताई जा सकती है — और बेन्नू की सतह पिसी हुई कॉफी से करीब 50 गुना कमज़ोर है।
चरण दर चरण
- 1
पत्थरों के बीच कण भरे गए
- 2
पत्थरों को धीरे खींचा गया
- 3
ब्रिज में तनाव बढ़ा, फिर टूटा
- 4
अधिकतम तनाव से मज़बूती मापी
- 5
बेन्नू के कणों पर लागू किया
बेन्नू, र्यूगु और इतोकावा जैसे कई छोटे क्षुद्रग्रह ठोस चट्टान नहीं हैं। वे धूल, चट्टान और बड़े पत्थरों के ढीले ढेर हैं, जो मुख्यतः अपने गुरुत्वाकर्षण और कणों के बीच के कमज़ोर आपसी खिंचाव से जुड़े रहते हैं। वैज्ञानिक एक दशक से भी अधिक समय से यह अध्ययन कर रहे हैं कि ऐसे 'रबल-पाइल' क्षुद्रग्रह कैसे जुड़े रहते हैं। पहले के सिमुलेशन कणों को केवल पूर्ण गोलाकार मानकर चलते थे, जबकि असली कण कोणीय और अनियमित होते हैं। कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय के पॉल सांचेज़ के नेतृत्व में नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने असली कण आकृतियों को ध्यान में रखने वाला एक ढांचा तैयार किया है।
पूरे क्षुद्रग्रह के बजाय टीम ने उसके एक छोटे हिस्से का मॉडल बनाया: एक-एक मीटर के दो बड़े पत्थरों के बीच चिपकने वाले महीन कणों को भरकर एक 'ग्रैन्युलर ब्रिज' बनाया गया। पत्थरों को धीरे-धीरे खींचकर अलग करने पर यह ब्रिज टूटा, और इससे उसकी तन्य शक्ति नापी गई। शोधकर्ताओं ने गोलाकार से लेकर 10 अलग-अलग कोणीय, लंबी और चपटी आकृतियों तक, 2 से 5 सेंटीमीटर आकार के कणों का उपयोग कर 78 सिमुलेशन चलाए। इनमें गुरुत्वाकर्षण के साथ-साथ कणों के बीच का कमज़ोर आकर्षण बल, जिसे 'वान डेर वाल्स' कहा जाता है, भी शामिल किया गया।
सिमुलेशन से पता चला कि मज़बूती दो बातों पर निर्भर करती है: कण कितने बड़े हैं, और वे गोलाकार से कितना अलग हैं। छोटे कण सघनता से भरते हैं और अधिक संपर्क बिंदु बनाते हैं, जिससे मज़बूत ब्रिज बनते हैं। कोणीय कण भी एक बिंदु के बजाय किनारे या सतह से छूते हैं, जिसका असर लगभग वैसा ही होता है। सांचेज़ ने बताया कि कण का आकार या कण की आकृति, इनमें से किसी एक को जानकर ही क्षुद्रग्रह की मज़बूती का अनुमान लगाया जा सकता है, और यही बात इस ढांचे को सार्वभौमिक बनाती है।
2023 में नासा के ओसाइरिस-रेक्स मिशन ने बेन्नू से नमूने धरती पर लाए, जिसके बाद उसकी सतह के कणों के गुण नापे जा सके। इस ढांचे को बेन्नू पर लागू करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि उसकी सतह की सामग्री पिसी हुई कॉफी से करीब 50 गुना कमज़ोर है। यह काम सांचेज़ और उनके साथियों द्वारा 2010 में दिए गए उस सुझाव की अगली कड़ी है, जिसमें कहा गया था कि गुरुत्वाकर्षण के अकेले कमज़ोर पड़ने वाली जगहों पर भी वान डेर वाल्स बल छोटे क्षुद्रग्रहों को जोड़े रख सकता है।
शब्दों की व्याख्या
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