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कोविड मौतों का सही आँकड़ा छिपा रहीं सरकारें: नया अध्ययन

134 देशों के नए विश्लेषण के अनुसार, 2020-2021 में दुनिया भर में असली कोविड-19 मौतें 12.47 मिलियन तक पहुँच सकती हैं, जबकि सरकारों ने आधिकारिक रूप से केवल 5.08 मिलियन मौतें दर्ज कीं।

चरण दर चरण

  1. 1

    134 देशों से मृत्यु आँकड़े जुटाना

  2. 2

    आधिकारिक मौतों की एक्सेस मॉर्टलिटी से तुलना

  3. 3

    आधे से अधिक मौतें कम बताई गईं

  4. 4

    संस्थागत नियंत्रण को कारण मानकर जाँचना

दुनिया भर की सरकारों ने वास्तव में हुई मौतों से कहीं कम कोविड-19 मौतें दर्ज कीं, यह बात जर्नल ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ में प्रकाशित एक नए अध्ययन में सामने आई है। यह अध्ययन हिब्रू विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री एरियल कार्लिंस्की और हिब्रू विश्वविद्यालय तथा किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर मोसेस शायो ने किया। उन्होंने आधिकारिक कोविड-19 मृत्यु संख्या की तुलना 'एक्सेस मॉर्टलिटी' नामक स्वतंत्र अनुमान से की। एक्सेस मॉर्टलिटी का मतलब है किसी अवधि में सामान्य रूप से होने वाली मौतों से अधिक दर्ज मौतें।

शोधकर्ताओं ने 134 देशों और क्षेत्रों से मृत्यु आँकड़े जुटाए। इसके लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों, जनसंख्या रजिस्ट्रियों और स्वास्थ्य मंत्रालयों के आँकड़ों का इस्तेमाल किया गया। 2020 और 2021 में सरकारों ने दुनिया भर में आधिकारिक तौर पर 5.08 मिलियन कोविड-19 मौतें दर्ज कीं। लेकिन एक्सेस मॉर्टलिटी अनुमान के अनुसार असली आँकड़ा 12.47 मिलियन तक हो सकता है, जो आधिकारिक आँकड़े से दोगुने से भी ज़्यादा है। अध्ययन बताता है कि करीब 45% से 55% सरकारों ने कोविड-19 मौतों का गलत आँकड़ा दिया, और कम बताना ज़्यादा बताने से कहीं अधिक आम रहा।

शोधकर्ताओं ने पहले यह जाँचा कि क्या किसी देश की सांख्यिकीय क्षमता, यानी बीमारी पहचानने, मौतें दर्ज करने और भरोसेमंद आँकड़ा तंत्र बनाए रखने की क्षमता, इस अंतर की वजह हो सकती है। लेकिन इस क्षमता से अंतर का बहुत छोटा हिस्सा ही समझाया जा सका। जिन देशों में सरकार की शक्ति पर मज़बूत संस्थागत नियंत्रण था, वहाँ कम बताने की समस्या बहुत कम थी। जिन देशों के नागरिकों के पास अधिक शिक्षा और इंटरनेट पहुँच थी, वहाँ भी गलत आँकड़े कम पाए गए, क्योंकि इससे लोगों के लिए सरकारी जानकारी परखना आसान होता है।

अपना अनुमान बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने केवल आधिकारिक मृत्यु आँकड़ों पर भरोसा नहीं किया, क्योंकि यह इस पर निर्भर करता है कि किसी मौत को कोविड-19 से जुड़ी मानकर कितनी सुसंगत तरीके से दर्ज किया गया। इसके बजाय एक्सेस मॉर्टलिटी पद्धति, महामारी के दौरान दर्ज कुल मौतों की तुलना पिछले वर्षों के आधार पर सामान्य रूप से होने वाली मौतों से करती है। यह एक स्वतंत्र जाँच है, जो इस बात पर निर्भर नहीं करती कि सरकार किसी मौत को किस तरह वर्गीकृत करती है।

लेखकों के अनुसार, महामारी के दौरान आधिकारिक कोविड-19 आँकड़ों ने यात्रा प्रतिबंधों जैसे अंतरराष्ट्रीय फैसलों को भी प्रभावित किया। उनका कहना है कि आधिकारिक आँकड़ों में ऐसी गड़बड़ियाँ विदेशी सहायता, जलवायु कार्रवाई और टीकाकरण अभियानों जैसे अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकती हैं।

शब्दों की व्याख्या

अब तक की कहानी

  1. 2049 तक वैश्विक टाइप 1 डायबिटीज़ मामलों में 29% वृद्धि का अनुमान
  2. कोविड मौतों का सही आँकड़ा छिपा रहीं सरकारें: नया अध्ययन
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