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किडनी रोग की जल्द पहचान के लिए एआई उपकरण बनाने वाला IIT मद्रास, CMC वेल्लोर

किडनी रोग की जल्द पहचान के लिए जोखिम-अनुमान मॉडल, सीटी-स्कैन क्लासिफायर और 3डी इमेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे एआई उपकरण IIT मद्रास और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर के शोधकर्ताओं ने बनाए हैं।

चरण दर चरण

  1. 1

    मॉडल क्लिनिकल डेटा से CKD जोखिम का अनुमान लगाता है

  2. 2

    डीप लर्निंग सीटी स्कैन को 4 श्रेणियों में बांटता है

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    3डी मॉडल ट्यूमर आकार, किडनी फैलाव मापता है

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    डॉक्टर परिणामों से इलाज की योजना बनाते हैं

आईआईटी मद्रास और वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) के शोधकर्ताओं ने किडनी रोगों का जल्दी पता लगाने और उनका आकलन करने में मदद करने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित उपकरण विकसित किए हैं। इनसे गंभीर नुकसान होने से पहले ही समय पर इलाज संभव हो सकेगा। इन तकनीकों में तीन चीज़ें शामिल हैं। पहला, नैदानिक और प्रयोगशाला आंकड़ों का उपयोग कर क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD) यानी दीर्घकालिक गुर्दा रोग के जोखिम का अनुमान लगाने वाला मशीन लर्निंग मॉडल। दूसरा, सीटी स्कैन का स्वतः विश्लेषण कर उन्हें सामान्य किडनी, किडनी सिस्ट, किडनी स्टोन और किडनी ट्यूमर इन चार श्रेणियों में बांटने वाला डीप लर्निंग सिस्टम। तीसरा, सीटी स्कैन से किडनी की 3डी छवि बनाकर ट्यूमर के आकार और किडनी में उसके फैलाव के प्रतिशत का सटीक आकलन करने वाला 3डी इमेजिंग प्लेटफॉर्म।

सीटी इमेज क्लासिफायर को 12,000 से अधिक छवियों पर प्रशिक्षित किया गया है और यह स्वस्थ किडनी को सिस्ट, स्टोन व ट्यूमर से अलग पहचान सकता है। ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर से बना 3डी इमेजिंग फ्रेमवर्क ट्यूमर के आकार का आकलन करने का एक सस्ता, दोहराया जा सकने वाला तरीका देता है, जो डॉक्टरों को इलाज की योजना बनाने में मदद कर सकता है।

आईआईटी मद्रास के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जी.एल. सैमुअल के अनुसार, किडनी रोग अक्सर शुरुआती चरण में बिना लक्षण के होते हैं और तब तक पकड़ में नहीं आते जब तक काफी नुकसान न हो चुका हो। सैमुअल ने कहा, "ये उपकरण डायलिसिस जैसे महंगे इलाज की ज़रूरत को कम कर सकते हैं। हमने मशीन लर्निंग को नैदानिक ज्ञान के साथ मिलाकर ऐसे उपकरण विकसित किए जो किडनी रोगों का जल्दी पता लगाने और मरीज़ के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी देने में मदद करें।"

आईआईटी मद्रास की शोध विद्वान जेनिफर डेलिक्टा ने बताया कि क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ मॉडल को एक सहज-उपयोग वाले प्रोटोटाइप के रूप में विकसित किया गया है। चिकित्सकों के लिए इसकी सटीकता व व्याख्या क्षमता बेहतर बनाने पर आगे काम जारी है। आईआईटी मद्रास और SPARC नामक शोध सहयोग परियोजना के समर्थन से हुआ यह अध्ययन किडनी का "डिजिटल ट्विन" बनाने की दिशा में भी एक कदम है। शोधकर्ता बड़े मरीज़ डेटासेट पर मॉडल की जांच करने और उन्हें पहनने योग्य सेंसर प्रणालियों के साथ जोड़कर व्यक्तिगत किडनी स्वास्थ्य निगरानी की संभावना तलाशने की योजना बना रहे हैं।

शब्दों की व्याख्या

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