मानव अंतरिक्ष उड़ान, शुक्र मिशन में ESA के साथ सहयोग बढ़ाने की तैयारी में ISRO
पेरिस के अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट में यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) और भारत की ISRO गगनयान, भारत के प्रस्तावित स्पेस स्टेशन, चंद्र अन्वेषण और आगामी शुक्र ऑर्बिटर मिशन पर व्यापक सहयोग की संभावनाएं तलाश रही हैं।
यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) और भारत की इसरो (ISRO) मानव अंतरिक्ष उड़ान, चंद्र अन्वेषण और ग्रह विज्ञान में व्यापक सहयोग की संभावनाएं तलाश रही हैं। अधिकारियों ने पेरिस में 9-10 सितंबर को हुए अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट में यह बताया। ESA के महानिदेशक योसेफ आश्बाकर के समिट के दौरान इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन से मिलने की उम्मीद थी।
भारत का गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम फिलहाल सबसे अहम फोकस है, जिसका लक्ष्य तीन सदस्यों के दल को लगभग 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिन के लिए भेजना और फिर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है। ESA और इसरो पहले ही एक तकनीकी क्रियान्वयन योजना पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इसके तहत यूरोपीय ग्राउंड स्टेशन गगनयान मिशनों के लिए ट्रैकिंग और संचार सहायता देंगे, खासकर जब अंतरिक्ष यान भारतीय ग्राउंड स्टेशनों की पहुंच से बाहर हो।
अधिकारी भारत के प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भी बातचीत कर रहे हैं, जो गगनयान मिशनों के बाद आना है. इसमें अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण, जीवन-सहायता प्रणाली, मिशन संचालन और वैज्ञानिक प्रयोग शामिल हो सकते हैं। दोनों एजेंसियां चंद्रमा के इर्द-गिर्द रोबोटिक और मानव मिशनों की क्षमताएं विकसित कर रही हैं, इसलिए चंद्र अन्वेषण भी एक संभावित सहयोग क्षेत्र है।
दोनों पक्ष ESA के ग्रह-विज्ञान लक्ष्यों और भारत के पहले समर्पित शुक्र मिशन, वीनस ऑर्बिटर मिशन के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रहे हैं। ₹1,236 करोड़ की लागत से मंज़ूर यह मिशन LVM-3 रॉकेट से मार्च 2028 में प्रक्षेपित होगा और शुक्र तक पहुंचने में लगभग 112 दिन लेगा। यह शुक्र के वायुमंडल, सतही प्रक्रियाओं और सौर विकिरण के साथ इसके संपर्क का अध्ययन करने के लिए 19 पेलोड ले जाएगा। प्रस्तावित सभी क्षेत्रों पर अभी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
शब्दों की व्याख्या
अब तक की कहानी
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