चार-रंग प्रमेय को मिला नया, अधिक कुशल कंप्यूटर प्रमाण
डेनमार्क, कनाडा और जापान के छह सदस्यीय गणितज्ञ दल (कार्स्टन थॉमासेन और मिकेल थोरुप सहित) ने चार-रंग प्रमेय का नया कंप्यूटर-सहायता प्राप्त प्रमाण मार्च 2026 में ऑनलाइन प्रकाशित किया। इसने नक्शों को रंगने का कहीं अधिक कुशल तरीका और प्लेनर ग्राफ को लेकर नई…
चरण दर चरण
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1852: गुथरी ने चार रंग पर्याप्त पाए
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1879: केम्प का प्रमाण 11 साल बाद गलत
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1976: पहला कंप्यूटर प्रमाण, विवाद खड़ा
- 4
1997: सरल कंप्यूटर प्रमाण से बहस थमी
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2026: नई टीम का अधिक कुशल प्रमाण
गणित की सबसे मशहूर पहेलियों में से एक है चार-रंग प्रमेय: क्या किसी भी सतत नक्शे में हर हिस्से को केवल चार रंगों से इस तरह रंगा जा सकता है कि पड़ोसी हिस्सों का रंग कभी एक जैसा न हो? यह सवाल 1852 में शुरू हुआ, जब गणितज्ञ फ्रांसिस गुथरी अंग्रेज़ी काउंटियों के नक्शे को रंगते हुए यह देखकर चौंके कि उन्हें केवल चार रंगों की ज़रूरत पड़ी। उन्होंने सोचा कि क्या यह हमेशा सच होता है। उनके भाई के सलाहकार, ऑगस्टस डी मॉर्गन ने इस पहेली में रुचि ली और इसे व्यापक रूप से प्रचारित करने में मदद की।
1879 में एल्फ्रेड ब्रे केम्प ने इसका समाधान खोजने का दावा किया, जिसे उस समय 'नेचर' पत्रिका में एक प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिए सराहा गया था। उनका तर्क 11 साल तक टिका रहा, इसके बाद इसे गलत साबित कर दिया गया; इसके बाद भी कई और गलत प्रमाण सामने आते रहे। यह प्रमेय आखिरकार 1976 में सिद्ध हुआ, लेकिन इसके लिए इस्तेमाल की गई कंप्यूटर विधियों को कई गणितज्ञों ने विवादास्पद माना, जिससे यह बहस फिर छिड़ गई कि आखिर एक 'प्रमाण' किसे कहा जाए। यह बहस 1997 तक चलती रही, जब एक सरल कंप्यूटर-सहायता प्राप्त प्रमाण खोजा गया।
अब छह सदस्यीय एक टीम ने लगभग एक दशक की मेहनत के बाद एक और कंप्यूटर-सहायता प्राप्त प्रमाण तैयार किया है। इस टीम में डेनमार्क की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कार्स्टन थॉमासेन, कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के मिकेल थोरुप, केन-इची कवाराबायाशी, बोयान मोहार और डेनमार्क, कनाडा तथा जापान के दो अन्य सहयोगी शामिल हैं। इसे मार्च 2026 में ऑनलाइन प्रकाशित किया गया और नवंबर में 'फाउंडेशन्स ऑफ कंप्यूटर साइंस' सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा।
यह नया प्रमाण कुछ मायनों में पहले के प्रमाणों से भी अधिक जटिल है। लेकिन इसे तैयार करते समय टीम ने नक्शों को रंगने का कहीं अधिक कुशल तरीका खोज निकाला। साथ ही, टीम ने 'प्लेनर ग्राफ' नामक गणितीय संरचनाओं (जो नक्शों को बिंदुओं और रेखाओं के रूप में दर्शाती हैं) के गुणों को लेकर नई अंतर्दृष्टि भी हासिल की। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये अंतर्दृष्टि ग्राफ थ्योरी की अन्य पुरानी समस्याओं को सुलझाने में भी मदद कर सकती हैं।
डेनमार्क की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के ग्राफ थ्योरी विशेषज्ञ थॉमासेन ने कहा, 'यह ऐसी समस्या है जिसे एक बच्चा भी समझ सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे लगता है यही वजह है कि यह इतनी बड़ी चुनौती बनी रही।'
शब्दों की व्याख्या
अब तक की कहानी
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