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ICMR के अध्ययन में भारतीय महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े जीन चिह्न मिले

ICMR-NIRRCH और क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के अध्ययन में भारतीय महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के खतरे से जुड़े WNT4 और CDKN2B-AS1 जीन चिह्नित किए गए हैं। यह दक्षिण एशियाई महिलाओं के जीनोम का पहला ऐसा विश्लेषण है।

चरण दर चरण

  1. 1

    पीड़ित-स्वस्थ महिलाओं के डीएनए की तुलना

  2. 2

    बीमारी से जुड़े 21 जीन क्षेत्र चिह्नित

  3. 3

    WNT4, CDKN2B-AS1 मुख्य जीन चिह्न बने

  4. 4

    दक्षिण एशिया के लिए जोखिम-अनुमान उपकरण निर्माण

एक अध्ययन में भारतीय महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े आनुवंशिक चिह्न मिले हैं। इस दर्दनाक स्थिति को समझने के लिए दक्षिण एशियाई महिलाओं के जीनोम का विश्लेषण करने वाला यह पहला शोध है। यह अध्ययन सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है। इसका नेतृत्व मुंबई स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ (ICMR-NIRRCH) ने ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के साथ मिलकर किया। इसमें भारत भर के 18 सरकारी और निजी अस्पताल शामिल हुए।

एंडोमेट्रियोसिस तब होता है जब गर्भाशय की परत जैसा ऊतक गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। यह एक दीर्घकालिक स्थिति है जो गंभीर पेल्विक दर्द, संभोग में दर्द, लगातार थकान और बांझपन का कारण बनती है। दुनिया भर में प्रजनन आयु की करीब 10% महिलाएं इससे प्रभावित हैं। दुनिया भर की 247 मिलियन महिलाओं में से भारत में करीब 50 मिलियन महिलाएं इससे प्रभावित मानी जाती हैं। गंभीर मासिक धर्म दर्द को अक्सर मामूली मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, इसलिए कई महिलाएं सालों तक निदान का इंतज़ार करती हैं।

सर्जरी से पुष्टि हो चुकीं एंडोमेट्रियोसिस पीड़ित महिलाओं के डीएनए की स्वस्थ महिलाओं से तुलना कर शोधकर्ताओं ने इस स्थिति से जुड़े 21 अलग जीन क्षेत्र चिह्नित किए। सबसे मज़बूत संकेत क्रोमोसोम 13 पर मिला, जिसमें WNT4 और CDKN2B-AS1 जीन भी शामिल हैं। आंकड़ों से पता चला कि भारतीय महिलाएं वैश्विक आबादी के साथ कई आनुवंशिक जोखिम साझा करती हैं, लेकिन उनमें क्षेत्र विशेष के अलग जीन संकेत भी हैं।

मुख्य लेखिका डॉ. संध्या आनंद ने बताया कि ये निष्कर्ष तुरंत क्लिनिकल परीक्षण के लिए नहीं हैं। लेकिन ये रोग की जीव विज्ञान समझने और दक्षिण एशियाई महिलाओं के लिए जोखिम-अनुमान उपकरण बनाने की एक अहम नींव रखते हैं, उन्होंने कहा। एंडोमेट्रियोसिस पर ज़्यादातर वैश्विक आनुवंशिक अध्ययन अब तक यूरोपीय और पूर्वी एशियाई मूल की महिलाओं पर ही केंद्रित रहे हैं।

प्रमुख अन्वेषक डॉ. राहुल के. गजभिये ने कहा कि यह शोध भारत की खास चिकित्सीय वास्तविकताओं और आनुवंशिक विविधता पर आधारित आंकड़े देकर उस वैश्विक कमी को पाटने में मदद करता है। यह निष्कर्ष ऐसे समय आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन एंडोमेट्रियोसिस के प्रबंधन के लिए अपने वैश्विक दिशानिर्देश अपडेट कर रहा है।

शब्दों की व्याख्या

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