मैनहटन की हवा को मापने के लिए कॉर्नेल इंजीनियरों ने बनाया 'डिजिटल ट्विन'
मैनहटन के कार्बन डाइऑक्साइड स्तर को रीयल-टाइम में दिखाने वाला 'डिजिटल ट्विन' मॉडल कॉर्नेल इंजीनियरों ने तैयार किया है, जो शहर योजनाकारों को प्रदूषण के हॉटस्पॉट पहचानने और उपाय लागू करने से पहले उन्हें परखने में मदद कर सकता है।
चरण दर चरण
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फिजिकल परत शहर के आंकड़े जुटाती है
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डिजिटल परत आंकड़ों को व्यवस्थित और मॉडल करती है
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'ब्रेन' परत मशीन लर्निंग से अनुमान लगाती है
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सर्विस परत कदम और विज़ुअलाइज़ेशन सुझाती है
शहरी कार्बन डाइऑक्साइड स्थितियों को रीयल-टाइम आभासी रूप में दिखाने वाला 'डिजिटल ट्विन' ढांचा कॉर्नेल विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने विकसित किया है, जो उत्सर्जन पर नज़र रखने, प्रदूषण के हॉटस्पॉट पहचानने और असल दुनिया में लागू करने से पहले संभावित उपायों को परखने में शहर योजनाकारों की मदद कर सकता है। एनवायरनमेंटल मॉडलिंग एंड सॉफ्टवेयर जर्नल में प्रकाशित इस परियोजना ने मैनहटन को अपना पहला परीक्षण स्थल बनाया, और इसका नेतृत्व कॉर्नेल के डफील्ड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सिस्टम्स इंजीनियरिंग प्रोग्राम तथा सेंटर फॉर ट्रांसपोर्टेशन, एनवायरनमेंट एंड कम्युनिटी हेल्थ के निदेशक एच. ओलिवर गाओ ने किया।
डिजिटल ट्विन किसी भौतिक तंत्र की एक रीयल-टाइम डिजिटल प्रतिकृति होती है, जो लगातार असली दुनिया के आंकड़ों को अपने कम्प्यूटेशनल मॉडल में शामिल करती रहती है। टीम के 'सस्टेनेबल अर्बन डिजिटल ट्विन' ने चार परतों वाले ढांचे का इस्तेमाल किया: बड़े डेटाबेस से आंकड़े जुटाने वाली फिजिकल परत, उन आंकड़ों को व्यवस्थित और मॉडल करने वाली डिजिटल परत, बायेसियन मॉडलिंग और मशीन लर्निंग से नतीजों का अनुमान लगाने वाली 'ब्रेन' परत, और फैसला लेने वालों के लिए कदम सुझाने तथा विज़ुअलाइज़ेशन जैसे उपकरण देने वाली सर्विस परत।
सिस्टम्स इंजीनियरिंग प्रोग्राम की एज़रा पोस्टडॉक्टरल फेलो और अध्ययन की सह-प्रमुख लेखक यिशुओ च्यांग कहती हैं, "हमने मैनहटन को अपना पायलट स्थल इसलिए चुना क्योंकि यह एक घना और जटिल शहरी माहौल है, जो हमारे डिजिटल ट्विन के लिए एक चुनौतीपूर्ण परीक्षण होगा। हमारे पास शहर भर से हर पांच मिनट में कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता, हवा का तापमान और नमी दर्ज करने वाले आंकड़े मौजूद थे, इसलिए हमने अपने प्रोटोटाइप को परखने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड को एक चर के रूप में चुना।" डिजिटल ट्विन का इस्तेमाल कर शोधकर्ताओं ने अलग-अलग स्रोतों के आंकड़ों को एक मंच पर जोड़ा, कार्बन डाइऑक्साइड स्तर पर नज़र रखी, आंकड़ों की अनिश्चितता नापी और शहर भर में स्थितियां कैसे बदलती हैं यह दिखाने वाले नक्शे बनाए।
शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा मंच को अभी एक शोध प्रोटोटाइप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, और पार्टिकुलेट मैटर, नाइट्रोजन ऑक्साइड या ज़मीनी स्तर के ओज़ोन जैसे प्रदूषकों का पूरी तरह प्रबंधन कर पाने से पहले अभी और काम की ज़रूरत है। वे इस मंच को अन्य प्रदूषकों और दूसरे शहरों तक फैलाने और AI-सहायता प्राप्त निर्णय-समर्थन जोड़ने की योजना बना रहे हैं। गाओ कहते हैं, "हम इस काम को शहरी बुद्धिमत्ता प्रणालियों की एक नई पीढ़ी की ओर पहला कदम मानते हैं। हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य ऐसी प्रणालियां शहरों और शहरी क्षेत्रों में बनाना है, जो आंकड़ों और मॉडलों को स्वस्थ, टिकाऊ और लचीले समुदायों के लिए काम की बुद्धिमत्ता में बदल दें।"
शब्दों की व्याख्या
अब तक की कहानी
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