घर की रोशनी में गायब इंडिगो रंग मायोपिया रोकने में मददगार?
आम इनडोर LED बत्तियों में लगभग गायब एक तरंगदैर्घ्य आंखों की रक्षा में मदद कर सकती है: नए अध्ययन के मुताबिक, इंसानी आंखों से मिलती-जुलती ट्री श्रू की आंखों में इंडिगो रोशनी ने मायोपिया को पूरी तरह रोक दिया।
दुनियाभर में मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष तेज़ी से बढ़ रहा है। कुछ विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक 2050 तक दुनिया की आधी आबादी, यानी करीब 5 अरब लोग, इससे प्रभावित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जो बच्चे स्क्रीन के सामने ज़्यादा समय घर के अंदर बिताते हैं और बाहर कम जाते हैं, उनमें यह समस्या ज़्यादा देखी जा रही है। सिनसिनाटी चिल्ड्रन्स और अलबामा विश्वविद्यालय, बर्मिंघम (UAB) के नए शोध में घर की रोशनी को ही इस खतरे को कम करने के एक संभावित तरीके के रूप में देखा गया है।
यह अध्ययन 18 अगस्त 2026 को सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन नामक पत्रिका में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ। इसमें इंडिगो रोशनी की जांच की गई — यह दृश्य प्रकाश की एक छोटी तरंगदैर्घ्य है जो सूर्य के प्रकाश में भरपूर मिलती है, लेकिन आम सफेद LED बत्तियों में लगभग नहीं होती। इंसानी आंखों जैसी आंखों वाले ट्री श्रू नामक छोटे स्तनधारी जीवों में, इंडिगो रोशनी में रखे गए जानवरों में मायोपिया बिल्कुल नहीं हुआ। प्रमुख लेखक डॉ. रिचर्ड लैंग ने कहा, 'अगर इन परीक्षणों में इंडिगो रोशनी मायोपिया को रोक सकती है, तो यह इंसानों में भी काफी असरदार होनी चाहिए।' लैंग सिनसिनाटी चिल्ड्रन्स से जुड़े हैं।
मायोपिया तब होता है जब आंख ज़्यादा लंबी हो जाती है, जिससे रोशनी रेटिना पर सीधे नहीं बल्कि उससे पहले ही केंद्रित होती है, और दूर की चीज़ें धुंधली दिखने लगती हैं। गंभीर मामलों में रेटिना अलग होने, ग्लूकोमा और मैक्युला डिजनरेशन का खतरा बढ़ जाता है। पहले चूहों पर हुए शोध में पाया गया था कि करीब 380 नैनोमीटर तरंगदैर्घ्य की वायलेट रोशनी मायोपिया को कम कर सकती है, और इसके लिए ऑप्सिन 5 (OPN5) नामक प्रकाश-संवेदी रिसेप्टर ज़रूरी है। लेकिन आंख का लेंस 400 नैनोमीटर से कम तरंगदैर्घ्य वाली ज़्यादातर रोशनी को रोक देता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि 419 से 446 नैनोमीटर के बीच की इंडिगो रोशनी लेंस को पार कर OPN5 को सक्रिय कर सकती थी। यही मायोपिया रोकने में सबसे कारगर थी।
लैंग ने कहा, 'हम बाहर, सूरज की पूरी स्पेक्ट्रम वाली रोशनी में विकसित हुए। जब हम घर के अंदर रहते हैं, तो आंख के सामान्य विकास के लिए ज़रूरी सभी तरंगदैर्घ्य नहीं मिलतीं। इसी वजह से मायोपिया होता है।' आम सफेद LED बत्तियां करीब 450 नैनोमीटर पर सबसे तेज़ होती हैं और उनमें इंडिगो रोशनी बहुत कम होती है। सिनसिनाटी चिल्ड्रन्स का 'साइंस ऑफ लाइट सेंटर' अब भाग लेने वाले डेकेयर केंद्रों में इंडिगो-युक्त रोशनी लगाकर बच्चों में मायोपिया की दर की तुलना समय के साथ करने की योजना बना रहा है।
