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लैंडस्पेस के झूक़ुए-3 बूस्टर की चीन में पहली वाणिज्यिक रॉकेट लैंडिंग

चीन की कंपनी लैंडस्पेस के झूक़ुए-3 रॉकेट का बूस्टर 19 अगस्त को सीधा खड़ा होकर उतरा, जो चीन के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र में पहली ऐसी लैंडिंग है।

चरण दर चरण

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    झूक़ुए-1 कक्षा तक पहुंचने में नाकाम (अक्टूबर 2018)

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    मीथेन से झूक़ुए-2 कक्षा तक पहुंचा (2023)

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    झूक़ुए-3 बूस्टर परीक्षण में दुर्घटनाग्रस्त (दिसंबर)

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    आठ महीने का पुनर्प्राप्ति प्रयास

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    बूस्टर सीधा उतरा (19 अगस्त)

चीन की कंपनी लैंडस्पेस द्वारा बनाया गया एक रॉकेट बूस्टर कक्षा से लौटकर 19 अगस्त को सीधा खड़ा होकर उतरा, जो चीन के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र के इतिहास में पहली ऐसी लंबवत बूस्टर लैंडिंग है। यह बूस्टर झूक़ुए-3 रॉकेट का हिस्सा है, जिसके मिशनों की कमान दाई जेंग के पास है। दाई जेंग 2016 में लैंडस्पेस में उप महाप्रबंधक के तौर पर शामिल होने से पहले चीन के सरकारी अंतरिक्ष कार्यक्रम में इंजीनियर थे।

यह सफल लैंडिंग दिसंबर में हुई एक असफल कोशिश के बाद आठ महीने के पुनर्प्राप्ति प्रयास के बाद हासिल हुई। पुनर्उपयोगिता, यानी रॉकेट के हिस्सों को दोबारा उड़ान के लिए बचाकर रखना और फिर से इस्तेमाल करना, कई मिशनों में प्रक्षेपण लागत बांटने में मदद करता है। लैंडस्पेस के नेतृत्व के अनुसार यह पृथ्वी की निचली कक्षा में बड़े उपग्रह समूह स्थापित करने की चीन की योजनाओं के लिए अहम है।

दाई जेंग 2009 से चीन की सरकारी संस्था चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी में रॉकेट अनुसंधान और विकास में काम कर रहे थे। वे चीन के पहले भारी-भरकम रॉकेट लॉन्ग मार्च 5 को डिज़ाइन करने वाले प्रमुख इंजीनियरों में से एक थे, इसके बाद वे तब केवल एक साल पुरानी कंपनी लैंडस्पेस से जुड़े। कंपनी का पहला रॉकेट झूक़ुए-1, अक्टूबर 2018 में अपनी पहली उड़ान में कक्षा तक पहुंचने में नाकाम रहा था। इसके बाद लैंडस्पेस ने अपनी खुद की तरल-प्रणोदन प्रणाली बनाई। जुलाई 2023 में उसका झूक़ुए-2 रॉकेट, जो खुद विकसित तियानक्यू तरल ऑक्सीजन-मीथेन इंजनों से चलता है, कक्षा तक पहुंचने वाला दुनिया का पहला मीथेन-ईंधन रॉकेट बना।

बड़ा झूक़ुए-3 रॉकेट अपने मुख्य ढांचे के लिए एल्युमिनियम मिश्रधातु के बजाय स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल करता है, जो स्पेसएक्स के स्टारशिप डिज़ाइन जैसा है। स्टेनलेस स्टील वजन में भारी है, लेकिन वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान बनने वाली गर्मी को बेहतर तरीके से झेल सकता है, जिससे कम ताप-कवच की जरूरत पड़ती है और उड़ानों के बीच मरम्मत आसान हो जाती है। अब लैंडस्पेस के सामने चुनौती है इस एक सफल बूस्टर रिकवरी को नियमित, बार-बार दोहराई जाने वाली पुनर्उपयोगिता में बदलने की।

शब्दों की व्याख्या

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