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MIT का नया AI मॉडल प्रकृति में न मिलने वाले प्रोटीन डिज़ाइन करता है

MIT शोधकर्ताओं ने PottsMPNN नाम का एक मशीन-लर्निंग ढांचा बनाया है। यह प्रोटीन डिज़ाइन को इस आधार पर नहीं आंकता कि वे विकास की चुनी हुई शृंखला की कितनी नकल करते हैं, बल्कि उनकी भौतिक स्थिरता के आधार पर आंकता है।

चरण दर चरण

  1. 1

    लक्षित प्रोटीन संरचना चुनी जाती है

  2. 2

    पुराने मॉडल विकास की शृंखला कॉपी करते

  3. 3

    PottsMPNN प्रशिक्षण में नॉइज़ जोड़ता है

  4. 4

    मॉडल कई शृंखलाएं, एक संरचना सीखता है

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    नए प्रोटीन डिज़ाइन की स्थिरता का अनुमान

किसी प्रोटीन का काम उसकी संरचना से तय होता है, और संरचना उसके अमीनो एसिड — यानी प्रोटीन के बुनियादी निर्माण खंड — की शृंखला से तय होती है। बीमारी फैलाने वाले अणुओं से जुड़ने वाले नए प्रोटीन डिज़ाइन करने के कई तरीके दो चरणों में काम करते हैं। पहले एक संरचना चुनी जाती है, फिर उस संरचना में मुड़ सकने वाली अमीनो एसिड शृंखलाएं बनाने के लिए मशीन-लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। प्रकृति में कई अलग-अलग शृंखलाएं एक ही संरचना में मुड़ सकती हैं। इसलिए AI मॉडल के लिए चुनौती यह सीखना है कि सिर्फ़ एक ऐसी शृंखला नहीं है जिसे विकास ने चुना, बल्कि कई उपयोगी जवाब मौजूद हो सकते हैं।

MIT जीव विज्ञान विभाग की प्रमुख और इस अध्ययन की वरिष्ठ लेखक एमी कीटिंग ने कहा, 'इस क्षेत्र ने वर्षों तक सफलता को इस आधार पर मापा है कि कोई मॉडल विकास द्वारा चुनी गई प्रोटीन शृंखला को दोबारा बना सकता है या नहीं। हमारा शोध दिखाता है कि यह प्रोटीन डिज़ाइन के लिए सबसे अच्छा पैमाना नहीं है।' यह अध्ययन पीएनएएस में प्रकाशित हुआ है। PottsMPNN नाम का यह नया ढांचा प्रोटीन की संरचना और स्थिरता तय करने वाले भौतिक सिद्धांतों को शामिल करता है। यह शृंखला बनाने की क्षमता और यह अनुमान लगाने की क्षमता दोनों को बेहतर करता है कि उत्परिवर्तन प्रोटीन की स्थिरता को कैसे प्रभावित करेंगे।

आज सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला प्रोटीन डिज़ाइन मॉडल 2022 में जारी हुआ था। अध्ययन के प्रमुख लेखक और स्नातक छात्र फ़ॉस्टर बर्नबॉम ने कहा कि तब से किसी मॉडल ने उसे पीछे नहीं छोड़ा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रोटीन संरचनाओं में जान-बूझकर बदलाव यानी 'नॉइज़' जोड़ना उनका तरीका था। इससे मॉडल की प्राकृतिक शृंखलाओं की हूबहू नकल करने की प्रवृत्ति कम हुई और वह जिन संरचनाओं के लिए शृंखलाएं बना सकता है उनकी विविधता बढ़ी। PottsMPNN एक जोड़ी-आधारित तरीका भी इस्तेमाल करता है, जो प्रोटीन में हर जोड़ी स्थिति पर संभव 20 अमीनो एसिड के बीच भौतिक अंतःक्रियाओं को ध्यान में रखता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यही मुख्य वजह है कि यह शृंखला और उसकी स्थिरता के बीच के संबंध को ज़्यादा सटीकता से दर्शाता है।

बर्नबॉम ने कहा, 'अगर हम पूरी तरह नई, डिज़ाइन की गई संरचना के बारे में सोच रहे हैं, तो उससे तुलना करने के लिए कोई प्राकृतिक शृंखला नहीं होगी'। उन्होंने आगे कहा, 'हमें असल में इस बात की परवाह है कि बनाई गई शृंखलाएं वांछित संरचनाओं में मुड़ने की कितनी संभावना रखती हैं। मॉडल शृंखला-ऊर्जा परिदृश्य को कितनी अच्छी तरह समझता है, और वह उत्परिवर्तन के प्रोटीन की स्थिरता पर पड़ने वाले असर का कितनी सटीकता से अनुमान लगा सकता है, यह भी अहम है'। टीम ने पाया कि जैसे-जैसे मॉडल प्राकृतिक शृंखलाओं पर कम निर्भर हुआ, संरचनात्मक अनुकूलता और स्थिरता के बारे में उसके अनुमान बेहतर होते गए। यह सुधार पूरी तरह नए प्रोटीन के लिए भी देखा गया।

शब्दों की व्याख्या

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