नासा के स्टारलिंग मिशन ने जीपीएस के बिना कक्षा की स्थिति मापी
नासा के स्टारलिंग मिशन ने फाल्कन (FALCON) नाम की एक प्रणाली का परीक्षण किया, जो जीपीएस के बजाय आसपास के उपग्रहों और मलबे को देखकर अपनी स्थिति तय करती है। यह प्रदर्शन नासा और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से निकली स्टार्टअप कंपनी ईराड्राइव ने मिलकर किया।
चरण दर चरण
- 1
कैमरे आसपास के उपग्रह, मलबा देखते हैं
- 2
फाल्कन दृश्यों को सूची से मिलाता है
- 3
प्रणाली यान की स्थिति निकालती है
- 4
यान बिना जीपीएस नेविगेट करता है
नासा के स्टारलिंग मिशन ने एक और उपलब्धि हासिल की है। इसने एक ऐसी प्रणाली का प्रदर्शन किया जो किसी अंतरिक्ष यान को बाहरी नेविगेशन नेटवर्क पर निर्भर हुए बिना, अंतरिक्ष में मौजूद अन्य वस्तुओं को देखकर अपनी कक्षीय स्थिति खुद तय करने देता है। इस तकनीक का नाम फाल्कन () है। इसका पूरा नाम है फास्ट ऑटोनॉमस लॉस्ट-इन-स्पेस कैटलॉग-बेस्ड ऑप्टिकल नेविगेशन। आसान शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी प्रणाली है जो पहले से मौजूद अंतरिक्ष वस्तुओं की सूची और कैमरे की मदद से किसी अंतरिक्ष यान को अपने-आप अपनी स्थिति पता लगाने देती है। यह प्रयोग नासा और ईराड्राइव नाम की उस स्टार्टअप कंपनी ने मिलकर किया, जो स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से निकली है।
पृथ्वी के नजदीक मौजूद उपग्रह आमतौर पर जीपीएस से रास्ता तय करते हैं। लेकिन चांद के आसपास और गहरे अंतरिक्ष में जीपीएस सिग्नल कमजोर पड़ जाते हैं या मिलते ही नहीं। फाल्कन इसका एक विकल्प देता है। यह स्टारलिंग यान के स्टार ट्रैकर कैमरों का इस्तेमाल करता है। ये कैमरे आमतौर चमकीली वस्तुओं को पहचानकर यान की दिशा तय करने में मदद करते हैं। फाल्कन इन्हीं कैमरों से आसपास के दूसरे उपग्रहों और अंतरिक्ष मलबे को देखता है, फिर उनकी तुलना पहले से मौजूद वस्तुओं की सूची से करता है, और उन वस्तुओं को संदर्भ बिंदु मानकर अपनी स्थिति निकालता है।
एक परीक्षण में, मिशन नियंत्रकों ने करीब 20,000 अंतरिक्ष वस्तुओं और उनकी अनुमानित कक्षाओं की एक सूची स्टारलिंग यान में डाली। फाल्कन ने इस सूची के आंकढ़ों की तुलना कैमरे से मिली जानकारी से की। इससे इसने स्टारलिंग की स्थिति तो निकाली ही, साथ ही दूसरी वस्तुओं की अनुमानित स्थिति को भी बेहतर बनाया। तीन दिनों में, जमीन से किसी भी हस्तक्षेप के बिना, फाल्कन ने 200 से ज्यादा वस्तुओं की ज्ञात कक्षाओं को बेहतर किया। इसके अनुमान मौजूदा सूची के आंकढ़ों से भी ज्यादा सटीक निकले। नासा के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी अंतरिक्ष यान ने ऑप्टिकल कैमरों और दूसरी वस्तुओं के सापेक्ष अपनी स्थिति के आधार पर खुद अपनी कक्षा तय की।
नासा के एम्स रिसर्च सेंटर (कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली में स्थित) के छोटे अंतरिक्ष यान और वितरित प्रणाली कार्यक्रम के प्रोग्राम मैनेजर रॉजर हंटर ने यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘फाल्कन, स्टारलिंग प्रदर्शन मिशन के लिए एक और सफलता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि कक्षा में यातायात निगरानी, टक्कर बचाव और वैकल्पिक नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में फाल्कन के नतीजों का असर दूर तक हो सकता है।
फाल्कन की शुरुआत एक यूनिवर्सिटी स्मॉलसैट टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप्स परियोजना के रूप में हुई थी, जो बाद में ईराड्राइव कंपनी में बदल गई। ईराड्राइव अब अपने ईरा-कोर (Era-Core) नाम के फ्लाइट सॉफ्टवेयर को व्यावसायिक रूप से बेच रही है। साल 2023 में लॉन्च हुआ स्टारलिंग मिशन इस साल के अंत में फाल्कन प्रयोग को और आगे बढ़ाएगा। तब स्टारलिंग मिशन के चारों अंतरिक्ष यान आपस में ट्रैकिंग जानकारी साझा करेंगे और मिलकर अपनी स्थिति को और सटीक बनाएंगे।
शब्दों की व्याख्या
अब तक की कहानी
- स्पेसएक्स ने किया 100 अरब डॉलर के स्टारबेस लुइज़ियाना का ऐलान.
- नासा की चंद्रा वेधशाला से 16 आकाशगंगाओं की नई तस्वीरें जारी.
- चंद्रमा के छायादार दक्षिणी ध्रुव में जीवित रह सकते हैं धरती के सूक्ष्मजीव.
- नासा के डीप स्पेस नेटवर्क में नया 34 मीटर एंटीना शुरू
- पुराने जासूसी उपग्रहों से बनी नासा की रोमन स्पेस टेलीस्कोप
- AI ने 100 मिलियन विकल्पों में ढूंढा नासा के रॉकेट मिश्रधातु का सस्ता 3D प्रिंटिंग तरीका
- नासा के स्टारलिंग मिशन ने जीपीएस के बिना कक्षा की स्थिति मापी
