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चावल के दाने जैसी चिप में 'इंद्रधनुष', 6G को मिलेगी रफ्तार

लॉफबरो विश्वविद्यालय के भौतिकविदों ने चावल के दाने के आकार की एक चिप बनाई है, जो स्थिर प्रकाश आवृत्तियाँ उत्पन्न करती है और इन्हें भविष्य के 6G नेटवर्क तथा क्वांटम समय-निर्धारण के लिए मिलीमीटर वेव में बदला जा सकता है।

चरण दर चरण

  1. 1

    लेज़र प्रकाश चिप और लूप में प्रवेश

  2. 2

    लूप प्रकाश वापस भेजकर स्थिर करता है

  3. 3

    एंटीना आवृत्तियों को मिलीमीटर वेव में बदलता

  4. 4

    संकेत 6G चैनल या समय-निर्धारण में उपयोगी

लॉफबरो विश्वविद्यालय के भौतिकविदों ने एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम के साथ मिलकर चावल के दाने के आकार की एक माइक्रोचिप बनाई है। यह चिप अत्यंत सटीक रूप से व्यवस्थित प्रकाश आवृत्तियों का एक "इंद्रधनुष" उत्पन्न करती है। यह शोध सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है। यह भविष्य में तेज़, अधिक क्षमता वाले 6G नेटवर्क और क्वांटम तकनीकों के लिए सटीक समय-निर्धारण में मदद कर सकता है।

यह चिप एक माइक्रोकॉम्ब (microcomb) नामक उपकरण है, जो इंद्रधनुष के रंगों की तरह सजी हुई सटीक प्रकाश आवृत्तियाँ उत्पन्न करता है, हालांकि यह प्रकाश मानव आंख को दिखाई नहीं देता। एक विशेष एंटीना इन आवृत्तियों को मिलीमीटर वेव नामक उच्च-आवृत्ति के विद्युत-चुंबकीय संकेतों में बदल देता है, जो मौजूदा नेटवर्क की तुलना में कहीं अधिक बैंडविड्थ देते हैं। पहले माइक्रोकॉम्ब केवल एक ही मिलीमीटर-वेव आवृत्ति उत्पन्न कर पाते थे। कई आवृत्तियों को एक साथ बनाना, जिनमें से हर एक अलग डेटा चैनल का काम कर सके, इसके लिए अब तक न मिली स्थिरता की ज़रूरत थी।

पारंपरिक माइक्रोकॉम्ब, लेज़र प्रकाश को माइक्रोरेज़ोनेटर (microresonator) नामक एक छोटी चिप संरचना में भेजकर काम करते हैं, जो प्रकाश को फंसाकर घुमाती रहती है। लॉफबरो टीम ने इसके बजाय चिप-आधारित माइक्रोरेज़ोनेटर को ऑप्टिकल फाइबर के एक बहुत बड़े लूप से जोड़ा। प्रकाश दोनों हिस्सों से लगातार गुजरता रहा, जिससे ये प्रकाश अवस्थाएँ बनने और स्थिर रहने में मदद मिली। लॉफबरो विश्वविद्यालय के इमर्जेंट फोटोनिक्स रिसर्च सेंटर के डॉ ल्यूक पीटर्स ने बताया कि उन्होंने एक बेहद सटीक और स्थिर 'चिप पर इंद्रधनुष' बनाया है। उनके अनुसार, लूप लगातार प्रकाश को वापस चिप में भेजता रहता है, जिससे ये अवस्थाएँ कुशलता से बनती हैं, अपने आप शुरू होती हैं और सिस्टम के बाधित होने पर भी स्थिर रहती हैं। उन्होंने आगे बताया कि जब लोग सिस्टम के पास कूदते रहे, तब भी माइक्रोकॉम्ब स्थिर बना रहा।

शोधकर्ताओं ने यह भी दिखाया कि वे माइक्रोकॉम्ब के भीतर अलग-अलग आवृत्तियों को मज़बूत या कमज़ोर कर सकते हैं, और मिलीमीटर वेव में बदलने के बाद भी माइक्रोकॉम्ब की सटीकता बनी रही। फिलहाल पूरा सिस्टम एक टेबलटॉप प्रयोगशाला में समाया हुआ है। हालांकि भविष्य के संस्करण सिकुड़कर एक जूते के डिब्बे (shoebox) जितने छोटे हो सकते हैं, जिनका उपयोग संभवतः उपग्रहों में भी किया जा सकता है। टीम अब माइक्रोकॉम्ब की समय-सटीकता की तुलना सटीक घड़ियों से कर रही है। इसके लिए वह नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के साथ काम कर रही है। साथ ही, क्वांटम-सक्षम स्थिति, नेविगेशन और समय-निर्धारण के लिए यूके हब (QEPNT) के साथ भी मिलकर काम कर रही है।

शब्दों की व्याख्या

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