साइंस टेक पल्स
भारतीय विज्ञान

धरती का तापमान मापने इसरो-फ्रांस का साझा उपग्रह मिशन ट्रिष्ना, 2027 में प्रक्षेपण

पृथ्वी के तापमान, जल-तनाव और ग्लेशियरों पर नज़र रखने के लिए इसरो और सीएनईएस मिलकर ट्रिष्ना उपग्रह बना रहे हैं, जिसे 2027 में पीएसएलवी से प्रक्षेपित किया जाना है।

पृथ्वी की सतह के तापमान और जल-तनाव पर नज़र रखने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो - ISRO) और फ्रांस की राष्ट्रीय अंतरिक्ष अध्ययन एजेंसी (सीएनईएस - CNES) मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों मिलकर ट्रिष्ना (TRISHNA) नाम का पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह मिशन विकसित कर रहे हैं। 'हाई-रिज़ॉल्यूशन प्राकृतिक संसाधन आकलन के लिए थर्मल इन्फ्रारेड इमेजिंग सैटेलाइट' का संक्षिप्त रूप ही ट्रिष्ना नाम है। यह उपग्रह थर्मल-इन्फ्रारेड और ऑप्टिकल अवलोकनों को जोड़कर पृथ्वी की सतह के तापमान, जल-तनाव, वनस्पति, ग्लेशियर, शहरी गर्मी तथा अंतर्देशीय और तटीय जल की स्थिति का अध्ययन करेगा। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जल-मांग के कारण भूमि पर जल और ऊर्जा के प्रवाह की सटीक जानकारी ज़रूरी होती जा रही है, इसरो और सीएनईएस का कहना है।

भारत-फ्रांस सहयोग से ट्रिष्ना मिशन में दो प्रमुख उपकरण प्रणालियां लगाई जाएंगी। थर्मल इन्फ्रारेड (TIR) उपकरण सीएनईएस ने विकसित किया है, जो चार थर्मल-इन्फ्रारेड बैंड की मदद से भूमि और जल सतह के तापमान तथा उत्सर्जन क्षमता (emissivity) को मापेगा। दृश्य, निकट-इन्फ्रारेड और शॉर्ट-वेव इन्फ्रारेड डेटा को मिलाने वाला VNIR/SWIR उपकरण इसरो ने विकसित किया है, जो वनस्पति, सतह परावर्तन और पर्यावरणीय स्थितियों की जानकारी देगा। थर्मल और ऑप्टिकल डेटा को एक ही मिशन में जोड़ना ट्रिष्ना मिशन की सबसे बड़ी खासियत मानी जाती है।

इस उपग्रह को भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी - PSLV) से प्रक्षेपित करने की योजना है, और फिलहाल इसका लक्ष्य वर्ष 2027 रखा गया है। ट्रिष्ना 761 किलोमीटर ऊंचाई की सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा में काम करेगा और इसका मिशन जीवनकाल पांच वर्ष तय किया गया है।

सतह के तापमान और ऑप्टिकल डेटा को जोड़कर ट्रिष्ना उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करेगा जहां जल-तनाव है। यह मिट्टी से वाष्पीकरण तथा पौधों से पानी निकलने के जरिए होने वाले कुल जल-क्षय का आकलन भी करेगा, जिसे एवापोट्रांस्पिरेशन () कहा जाता है। इससे सटीक सिंचाई और कृषि जल-प्रबंधन में मदद मिलेगी। यह मिशन शहरी गर्मी द्वीपों का नक्शा भी बनाएगा, जहां निर्मित क्षेत्र आसपास से ज़्यादा गर्म रहते हैं। पहाड़ी इलाकों में ग्लेशियर की गतिविधि और बर्फ पिघलने से जुड़े अध्ययनों में भी इसके थर्मल अवलोकन योगदान देंगे।

इस मिशन में भारत उपग्रह निर्माण, रिमोट सेंसिंग और प्रक्षेपण क्षमता का योगदान देता है, जबकि फ्रांस थर्मल-इन्फ्रारेड पृथ्वी-अवलोकन तकनीक उपलब्ध कराता है।

शब्दों की व्याख्या

अब तक की कहानी

  1. OptoSAR तकनीक के लिए GalaxEye को मिला अमेरिकी पेटेंट
  2. बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में पांच भारत-ऑस्ट्रेलिया अंतरिक्ष समझौते
  3. अग्निकुल कॉसमॉस ने पुन: प्रयोज्य रॉकेट चरणों की जांच के लिए चेन्नई में दो नई सुविधाएं शुरू कीं
  4. मानव अंतरिक्ष उड़ान, शुक्र मिशन में ESA के साथ सहयोग बढ़ाने की तैयारी में ISRO
  5. LVM3 के लिए उन्नत CE20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल हॉट टेस्ट इसरो ने किया
  6. भारत-फ्रांस निजी अंतरिक्ष सहयोग को नई गति देने वाले समझौते
  7. धरती का तापमान मापने इसरो-फ्रांस का साझा उपग्रह मिशन ट्रिष्ना, 2027 में प्रक्षेपण
#TRISHNA#ISRO#CNES#PSLV#Earth observation#India-France cooperation
इस खबर को रेटिंग दें

संबंधित खबरें