क्रिस्टल कैसे बनते हैं? सौ साल पुराने सिद्धांत को चुनौती देती नई खोज
UCLA के वैज्ञानिकों ने परमाणु दर परमाणु, 3D में क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया देखी और पाया कि क्रिस्टल व उसके आसपास के अव्यवस्थित पदार्थ के बीच कोई तीखी सीमा नहीं, बल्कि क्रमिक बदलाव होता है। यह अध्ययन नेचर मटीरियल्स में प्रकाशित हुआ है।
UCLA के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने क्रिस्टल न्यूक्लिएशन को परमाणु दर परमाणु, त्रि-आयामी (3D) रूप में चित्रित किया है। जब कोई पदार्थ जमता है, संघनित होता है या किसी और तरीके से अपनी अवस्था बदलता है, तो अव्यवस्थित पदार्थ के भीतर न्यूक्लियस कहलाने वाले छोटे, व्यवस्थित हिस्से बनने की प्रक्रिया को न्यूक्लिएशन कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि क्रिस्टल और उसके आसपास के अव्यवस्थित पदार्थ के बीच बदलाव क्रमिक होता है, न कि उस तीखी सीमा जैसा जिसकी भविष्यवाणी लगभग सौ साल पुराने क्लासिकल न्यूक्लिएशन सिद्धांत ने की थी। यह अध्ययन नेचर मटीरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
इस शोध का नेतृत्व करने वाले प्रमुख लेखक जियानवेई "जॉन" मियाओ, UCLA कॉलेज में भौतिकी और खगोलशास्त्र के प्रोफेसर हैं और UCLA के कैलिफोर्निया नैनोसिस्टम्स इंस्टीट्यूट के सदस्य भी हैं। टीम ने उच्च और मध्यम-एन्ट्रॉपी मिश्र धातुओं से बने नैनोकणों की जांच की; इन मिश्र धातुओं में कई धात्विक तत्व लगभग समान मात्रा में मिले होते हैं, जबकि स्टील जैसी सामान्य मिश्र धातुओं में एक ही मुख्य तत्व प्रमुख होता है। शोधकर्ताओं ने पहले नैनोकणों को गर्म किया, फिर उन्हें 3,000 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक तापमान से कमरे के तापमान तक एक सेकंड के कुछ सौवें हिस्से में तेज़ी से ठंडा किया, जिससे क्रिस्टल न्यूक्लियस अलग-अलग चरणों में कैद हो गए। एटॉमिक इलेक्ट्रॉन टोमोग्राफी नामक 3D इमेजिंग तकनीक से, जो हर परमाणु का नक्शा बनाती है, टीम ने 8,000 से अधिक न्यूक्लियस को फिर से बनाया, जिनमें 10 से कम से लेकर 1,000 से अधिक परमाणु शामिल थे।
"ये क्रिस्टल एक जैसे नहीं थे, और इनके व अपने आसपास के अव्यवस्थित परमाणुओं के बीच कोई तीखी सीमा नहीं थी, जैसा कि क्लासिकल न्यूक्लिएशन सिद्धांत ने बताया था," मियाओ ने कहा। "इसके बजाय, हमने एक ग्रेडिएंट यानी क्रमिक बदलाव देखा। हर न्यूक्लियस के केंद्र में सबसे अधिक क्रिस्टलीयता थी। जैसे-जैसे उस केंद्र से सीमा की ओर बढ़ते गए, वह और अधिक अव्यवस्थित होता गया।" इस पैटर्न को समझाने के लिए शोधकर्ताओं ने एक नया समीकरण बनाया, जिसे 'ग्रेडिएंट न्यूक्लिएशन पाथवेज़ मॉडल' नाम दिया गया। यह क्लासिकल न्यूक्लिएशन सिद्धांत को खारिज नहीं करता, बल्कि उसका विस्तार करता है। मियाओ के अनुसार, पुराने मामले को इस नए समीकरण में रखने पर क्लासिकल सिद्धांत के जैसे ही नतीजे मिलते हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि आसपास के अधिकांश क्रिस्टल न्यूक्लियस आपस में जुड़ने से पहले ही एक जैसी दिशा में विकसित हो चुके थे। इस अध्ययन में इस्तेमाल की गई उच्च और मध्यम-एन्ट्रॉपी मिश्र धातुएं लगभग दो दशक पहले पहली बार पेश की गई थीं।
शब्दों की व्याख्या
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