ब्लैक होल की फ्लेयर बार-बार धीमी क्यों पड़ती है? तारे के घूर्णन में जवाब
सुपरमैसिव ब्लैक होल के पास बार-बार पहुंचने वाले तारों की फ्लेयर धीरे-धीरे धीमी क्यों पड़ती है, यह लंबे समय से एक पहेली रही है। सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका कारण तारे का अपना घूर्णन और 'हिल्स कैप्चर' नामक तारा-जोड़े के टूटने की…
चरण दर चरण
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बाइनरी तारा ब्लैक होल के निकट आता
- 2
हिल्स कैप्चर एक निकालता, दूसरा पकड़ा जाता
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पकड़ा गया तारा तेज़ी से घूमता है
- 4
हर गुज़र में बाहरी परत छिनती है
- 5
घूर्णन ज़्यादा न बढ़ने से फ्लेयर धीमी
कुछ तारे सुपरमैसिव ब्लैक होल के बेहद करीब से गुज़रने के बावजूद पूरी तरह नष्ट नहीं होते। हर बार गुज़रने पर ब्लैक होल तारे से थोड़ी सामग्री छीन लेता है। खगोलविद इसे 'रिपीटिंग पार्शियल टाइडल डिसरप्शन इवेंट' (rpTDE) कहते हैं। हर बार एक चमकीली फ्लेयर (प्रकाश की चमक) दिखाई देती है, लेकिन हर नई घटना के साथ यह फ्लेयर धीमी क्यों पड़ती जाती है, यह सवाल लंबे समय से खगोलविदों को उलझन में डाले हुए था। सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय की अनन्या बंदोपाध्याय के नेतृत्व में शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने शायद इस पहेली को सुलझा लिया है।
जब कोई तारा ब्लैक होल के बहुत करीब पहुंच जाता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण बल तारे को एक लंबी प्लाज़्मा धारा में खींच देता है — इसे 'स्पघेटिफिकेशन' कहा जाता है। इस तरह तारा पूरी तरह ब्लैक होल का ग्रास बन जाता है, जिसे टाइडल डिसरप्शन इवेंट (TDE) कहते हैं। rpTDE में तारा पूरी तरह नष्ट नहीं होता, बल्कि बार-बार ऐसे 'कौर' सहता है और हर बार चमकता है।
टीम ने पहले ही पाया था कि तारा कितनी सामग्री खोता है, यह उसकी संरचना पर निर्भर करता है। कम द्रव्यमान वाला तारा नरम मेरिंग्यू जैसा होता है, जिससे उसकी गहराई से भी सामग्री छिन जाती है। ज़्यादा द्रव्यमान वाला तारा प्याज़ की तरह परत-दर-परत बना होता है, जिसमें केवल बाहरी परतें ही छिनती हैं। लेकिन यह अकेला कारण अब तक खोजे गए दस rpTDE में से चार की धीमी पड़ती फ्लेयर को नहीं समझा सका। इसकी वजह यह है कि ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण गुज़रते तारे की घूर्णन गति भी बढ़ा देता है, जिससे उसकी कक्षा छोटी हो जाती है और फ्लेयर चमकीली बनी रहती है।
बची हुई कड़ी शायद यह है कि तारा अपनी पहली मुलाकात से पहले ही तेज़ी से घूम रहा हो। ऐसे में ब्लैक होल का प्रभाव उसकी घूर्णन गति को ज़्यादा नहीं बढ़ाता, कक्षा छोटी नहीं होती, और हर बार घटती हुई सामग्री की मात्रा फ्लेयर को धीमा दिखाती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तेज़ घूर्णन 'हिल्स कैप्चर' नामक प्रक्रिया से आ सकता है। ज़्यादातर तारे जोड़े (बाइनरी) में परिक्रमा करते हैं। जब एक कसकर बंधा तारा-जोड़ा ब्लैक होल के करीब आता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण उस जोड़े को अलग कर देता है। यह एक तारे को बाहर फेंक देता है और दूसरे को कुछ ही महीनों में एक चक्कर पूरा करने वाली तंग कक्षा में फंसा लेता है, जिससे वह तेज़ी से घूमने लगता है।
सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय की टीम के सदस्य एरिक कॉफलिन ने कहा कि यह सभी असामान्य पैटर्न एक ही अंतर्निहित कारण से समझाए जा सकते हैं — एक बाइनरी तारा प्रणाली का टूटना और उसमें से एक तारे का पकड़ा जाना। यह निष्कर्ष हमारी अपनी आकाशगंगा, मिल्की वे, के ब्लैक होल सैजिटेरियस ए* के आसपास तेज़ी से परिक्रमा करने वाले कई तारों की व्याख्या भी कर सकते हैं, हालांकि यह ब्लैक होल फिलहाल किसी rpTDE में शामिल नहीं है। यह शोध 18 अगस्त को द एस्ट्रोफिज़िकल जर्नल में प्रकाशित हुआ।
शब्दों की व्याख्या
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