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मीरकैट टेलीस्कोप ने दूर ब्रह्मांड से धीमा हाइड्रोजन संकेत सीधे पकड़ा

दक्षिण अफ्रीका के मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप से खगोलविदों ने अरबों प्रकाश-वर्ष दूर से आ रहे धीमे 21-सेंटीमीटर हाइड्रोजन संकेत का सीधा पता लगाया है, जो हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग तकनीक की क्षमता दिखाता है।

चरण दर चरण

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    उदासीन हाइड्रोजन 21-सेमी संकेत छोड़ता है

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    ब्रह्मांड फैलने पर संकेत खिंचता है

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    मीरकैट सम्मिलित रेडियो उत्सर्जन मापता है

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    शोधकर्ता हस्तक्षेप से धीमे संकेत को अलग करते हैं

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    हाइड्रोजन वितरण का त्रि-आयामी नक्शा बनता है

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय और वेस्टर्न केप विश्वविद्यालय के खगोलविदों ने दक्षिण अफ्रीका के मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया। इसकी मदद से उन्होंने अरबों प्रकाश-वर्ष दूर स्थित उदासीन हाइड्रोजन से आने वाले एक बेहद धीमे रेडियो संकेत का सीधा पता लगाया। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन के नतीजे हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग नाम की एक तकनीक की क्षमता दिखाते हैं। यह तकनीक खगोलविदों को ब्रह्मांड के विशाल क्षेत्रों का पहले से कहीं अधिक कारगर तरीके से अध्ययन करने में मदद करती है।

उदासीन हाइड्रोजन स्वाभाविक रूप से एक धीमा रेडियो संकेत छोड़ता है, जिसे 21-सेंटीमीटर रेखा कहा जाता है। जैसे-जैसे ब्रह्मांड फैलता है, यह संकेत लंबी तरंगदैर्ध्य में खिंच जाता है, जिससे खगोलविद ब्रह्मांडीय इतिहास के अलग-अलग दौर की हाइड्रोजन का अवलोकन कर पाते हैं। एक-एक करके अलग-अलग आकाशगंगाओं का पता लगाने के बजाय, हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग तकनीक कई आकाशगंगाओं से मिलकर आने वाले सम्मिलित रेडियो उत्सर्जन को मापती है। इससे ब्रह्मांड के विशाल हिस्सों का अध्ययन करना और उसकी त्रि-आयामी तस्वीर बनाना संभव हो जाता है। अब तक इतनी दूरी पर इस तरह के संकेत रेडियो और ऑप्टिकल आंकड़ों को जोड़कर ही खोजे जाते थे, लेकिन इस अध्ययन में टीम ने केवल मीरकैट के रेडियो अवलोकनों से ही यह संकेत खोजा।

टीम ने मीरकैट के करीब 96 घंटे के अवलोकन आंकड़ों का विश्लेषण किया और ब्रह्मांडीय इतिहास के दो अलग-अलग दौर से यह संकेत खोजा, जो पृथ्वी तक पहुंचने में लगभग चार से पांच अरब वर्ष लेने वाले उत्सर्जन के अनुरूप हैं। ये मापन कई मिलियन प्रकाश-वर्ष के पैमाने पर हाइड्रोजन को दर्शाते हैं, जो आकाशगंगा (मिल्की वे) और उसकी पड़ोसी आकाशगंगा एंड्रोमेडा के बीच की दूरी के बराबर है। अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. सौरभ पॉल ने कहा, "यह बेहद रोमांचक उपलब्धि है।" उन्होंने बताया कि यह संकेत बेहद धीमा है और इसे अग्रभूमि उत्सर्जन तथा हस्तक्षेप से अलग करना मुश्किल है। प्रोफेसर सैंटोस ने बताया कि यह डेटा 2018 में लिया गया था, जब मीरकैट ने अभी-अभी अपना संचालन शुरू किया था, और इसके लिए कई तरह के मिश्रण स्रोतों को समझना ज़रूरी था।

सह-लेखक डॉ. झाओटिंग चेन ने कहा कि आकाशगंगाओं के बनने और विकसित होने को समझने के लिए उदासीन हाइड्रोजन एक अहम कड़ी है, क्योंकि इंटेंसिटी मैपिंग तकनीक हर आकाशगंगा को अलग से खोजे बिना बड़े क्षेत्रों से सम्मिलित संकेत मापती है। यह तकनीक स्क्वायर किलोमीटर एरे वेधशाला (SKAO) के लिए एक प्रमुख वैज्ञानिक प्रेरक बनने की उम्मीद है, जिसके लिए मीरकैट एक अग्रदूत टेलीस्कोप है। प्रोफेसर लॉरा वोल्ज़ ने कहा कि आकाश के बड़े हिस्सों को कवर करने वाले भविष्य के अवलोकन हाइड्रोजन का और अधिक विस्तृत नक्शा बनाएंगे।

शब्दों की व्याख्या

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