तंग सुरंग में कीड़े ज़्यादा तेज़ क्यों दौड़ते हैं?
नए शोध में पाया गया कि कैलिफ़ोर्निया के काले कीड़े खुली जगह के मुक़ाबले तंग नली में पाँच गुना तेज़ी से आगे बढ़ते हैं, जो नरम रोबोट बनाने में मदद कर सकता है।
इंसानों के लिए खुले मैदान में दौड़ना किसी सुरंग से रेंगने की तुलना में तेज़ होता है। लेकिन छोटे कीड़ों के लिए यह उल्टा है। फिज़िकल रिव्यू लेटर्स पत्रिका में 28 जुलाई को प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कैलिफ़ोर्निया के काले कीड़े खुली जगह की तुलना में तंग, संकरी नली में कहीं ज़्यादा तेज़ी से आगे बढ़ते हैं।
शोध टीम ने लुम्ब्रिकुलस वेरिएगेटस नामक पतले, जलीय कीड़ों का अध्ययन किया, जो लगभग 0.05 सेंटीमीटर चौड़े और 2.5 से 5 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। दोनों सिरों से खुली, पानी से भरी कांच की नलियों में इन कीड़ों को रेंगने दिया गया। जब नली की चौड़ाई कीड़े की चौड़ाई से महज़ दोगुनी थी, तो कीड़ा लगभग एक मिनट में दूसरे सिरे तक पहुँच गया। चौड़ी नलियों में वही दूरी तय करने में अधिकतम पाँच गुना ज़्यादा समय लगा।
इसका कारण समझने के लिए शोधकर्ताओं ने हर कीड़े को गतिशील मोतियों की एक लड़ी मानकर कंप्यूटर सिमुलेशन बनाए और उन्हें अलग-अलग चौड़ाई की आभासी नलियों से गुज़ारा। सिमुलेशन में कीड़े असली कीड़ों जैसा ही व्यवहार करते दिखे। कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय की भौतिक विज्ञानी के.आर. प्रत्युषा ने कहा, "सबसे तंग जगह में ही रफ़्तार सबसे ज़्यादा थी"। रफ़्तार इस बात पर निर्भर करती है कि कीड़ा कितना लचीला है और उसे कितनी जगह मिलती है, यह टीम के गणितीय मॉडल से पता चला। चौड़ी नली में कीड़ा दिशा बदलने की कोशिश में उलझकर भटकता है। लेकिन संकरी नली उस भटकाव को रोक देती है, जिससे कीड़ा दीवारों का सहारा लेकर सीधा आगे बढ़ता है।
कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय के ही जैव-आणविक इंजीनियर साद भामला ने कहा कि यह खोज नलियों में रेंगने वाले या इंसानी शरीर के भीतर घूमने वाले नरम, स्वचालित रोबोट डिज़ाइन करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा, "यह एक ऐसी प्रासंगिक समस्या लगी जिसमें भौतिकी इंजीनियरों को चीज़ें डिज़ाइन करने में मदद कर सकती थी"। इस अध्ययन से न जुड़े जॉर्जिया टेक के जैव-इंजीनियर डेविड हू ने इसे असामान्य नतीजा बताया। उनके अपने 2012 के अध्ययन में पाया गया था कि साँप, इन कीड़ों के उलट, संकरी नलियों में और धीमी गति से रेंगते हैं। हू ने कहा, "प्रकृति में यह बहुत दुर्लभ है कि कम जगह मिलने पर चीज़ें तेज़ हो जाएँ"।
अध्ययन से न जुड़े भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई (आईआईटी मुंबई) के भौतिक विज्ञानी रघुनाथ चेलक्कोट ने कहा कि इस अध्ययन की अहमियत इसमें है कि एक सरल मॉडल ने एक वास्तविक जैविक व्यवहार को पकड़ लिया। उन्होंने कहा, "जैविक तंत्र गड़बड़ और जटिल होते हैं। मुझे यह दिलचस्प लगा कि इतने सरल मॉडल से वे इस कीड़े की गति की कुछ ज़रूरी विशेषताएँ पकड़ पाए।"
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