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वैज्ञानिकों को मिलीं अतिचालकों में छिपी दो अवस्थाएं, जो एक जैसी दिखती थीं

येरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि नाइओबियम डाइसेलेनाइड और टैंटलम डाइसल्फाइड जैसे पतले पदार्थों को एक ही अतिचालक अवस्था वाला माना जाता था। असल में, इनमें दो अवस्थाएं इतनी मजबूती से जुड़ी हैं कि वे एक जैसी दिखती हैं, जिससे वर्षों पुरानी…

अतिचालक (सुपरकंडक्टर) यानी बिना किसी ऊर्जा हानि के विद्युत धारा प्रवाहित करने वाले पदार्थ, दशकों से भौतिकविदों के शोध का विषय रहे हैं। क्योंकि इनके भीतर इलेक्ट्रॉन कैसे व्यवहार करते हैं, इसे बारीकी से समझना आगे चलकर बेहतर सटीकता वाले अतिचालक पदार्थ और उपकरण डिज़ाइन करने में मददगार हो सकता है। इनका उपयोग क्वांटम कंप्यूटर, अत्यंत कुशल इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत चिकित्सा उपकरणों जैसी तकनीकों में हो सकता है। सबसे अधिक अध्ययन किए गए उदाहरणों में से एक, नाइओबियम डाइसेलेनाइड (NbSe2), जब केवल कुछ परमाणु परतों जितना पतला किया गया, तो सरल दिखा। प्रयोगों में यह एक ही "ऊर्जा अंतराल" रखता प्रतीत हुआ, जो यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन कैसे जोड़े बनाकर बिना प्रतिरोध के गति करते हैं।

लेकिन शोधकर्ताओं को शक था कि यह सरल तस्वीर अधूरी है। येरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी के राका इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिक्स और नैनोसाइंस एवं नैनोटेक्नोलॉजी केंद्र की एक टीम ने अत्यंत संवेदनशील टनलिंग स्पेक्ट्रोस्कोपी माप का उपयोग किया। इससे टीम ने पाया कि NbSe2 केवल एक अवस्था से संचालित सीधा-सादा अतिचालक नहीं है। बल्कि इसमें दो अलग-अलग अतिचालक अवस्थाएं हैं, जो एक-दूसरे से इतनी मजबूती से जुड़ी हैं कि वे एक जैसी दिखती हैं। यही छिपा हुआ व्यवहार एक निकट संबंधी पदार्थ, टैंटलम डाइसल्फाइड (TaS2) में भी पाया गया। शोधकर्ताओं ने कहा, "यह कुछ ऐसा है जैसे एक ही गायक गा रहा हो, लेकिन असल में पता चले कि यह पूरी तरह तालमेल में गाई गई एक युगल प्रस्तुति है"। पीएचडी छात्र शहर साइमन और एमएससी छात्रा माया क्लैंग के नेतृत्व में, प्रोफेसर ओडेड मिलो और प्रोफेसर हदर स्टाइनबर्ग के मार्गदर्शन में हुआ यह अध्ययन, जर्नल फिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशित हुआ।

यह दो-अवस्था वाली तस्वीर, वर्षों से अनसुलझी एक पहेली को समझाती है। पहले के प्रयोगों में दिखे अतिचालक ऊर्जा स्पेक्ट्रम के विस्तृत आकार को पारंपरिक सिद्धांत पूरी तरह दोहरा नहीं पाते थे। लेकिन दो अलग अतिचालक अवस्थाओं पर आधारित मॉडल ने माप को कहीं अधिक सटीकता से स्पष्ट किया, जिसमें यह भी शामिल है कि चुंबकीय क्षेत्र लगाए जाने पर ये पदार्थ कैसा व्यवहार करते हैं।

ये निष्कर्ष मोटे नमूनों में और भी अधिक जटिलता की ओर इशारा करते हैं। शोध के अनुसार, थोक (bulk) रूप वाले NbSe2 में एक-दूसरे से जुड़ी तीन अतिचालक अवस्थाएं हो सकती हैं, जो बताती हैं कि इन पदार्थों में अतिचालकता पहले समझे गए से कहीं अधिक जटिल है।

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