हीरे का गलनांक 1,000 डिग्री से भी ज़्यादा ग़लत आँका गया था, वैज्ञानिकों ने पाया
एक नए लेज़र प्रयोग ने हीरे के गलनांक का अब तक का सबसे सटीक माप दिया है, जिसमें पता चला कि पहले के प्रयोग 700°C से भी ज़्यादा ग़लत थे — यह खोज परमाणु संलयन शोध के लिए महत्वपूर्ण है।
शक्तिशाली लेज़र का इस्तेमाल कर हीरे को पिघलाकर, वैज्ञानिकों ने उसके गलनांक का अब तक का सबसे सटीक माप हासिल किया है। उन्होंने पाया कि पहले के प्रयोग 1,300 डिग्री फ़ारेनहाइट (700 डिग्री सेल्सियस) से भी ज़्यादा ग़लत थे।
पृथ्वी पर सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ हीरा, सही परिस्थितियों में बेहद शक्तिशाली लेज़र की चपेट में आने पर पिघल जाता है। ऐसे लेज़रों से पैदा होने वाली शॉक वेव्स पर हीरा कैसे प्रतिक्रिया करता है, यह समझना परमाणु संलयन विकसित करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही वह प्रक्रिया है जो तारों को ऊर्जा देती है, और जिसे भविष्य के संभावित ऊर्जा स्रोत के रूप में भी खोजा जा रहा है।
इसी वजह से, शोधकर्ताओं ने ऐसे चरम हालात में हीरे के व्यवहार का वर्णन और पूर्वानुमान करने वाले मॉडल विकसित करने में काफ़ी मेहनत की है। नया, अधिक सटीक गलनांक माप इन मॉडलों को और बेहतर बनाने में मदद करेगा।
शब्दों की व्याख्या
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