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4,581 जानवरों की ट्रैकिंग से पता चला: सिर्फ इंसानों का आसपास होना ही वन्यजीवों का व्यवहार बदल देता है

37 प्रजातियों के जीपीएस ट्रैकिंग डेटा को गुमनाम मोबाइल लोकेशन डेटा से जोड़ने पर पता चला कि केवल भूभाग में बदलाव ही नहीं, बल्कि इंसानों का आसपास मौजूद होना भी जंगली जानवरों के ठिकानों को बदल देता है।

चरण दर चरण

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    कोविड लॉकडाउन इंसानी आवाजाही बदलता है

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    शोधकर्ता 4,581 जानवरों को जीपीएस से ट्रैक करते हैं

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    मोबाइल डेटा इंसानों की मौजूदगी मापता है

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    दोनों की तुलना छिपे असर को उजागर करती है

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (सांता बारबरा), स्मिथसोनियन नेशनल ज़ू एंड कंज़र्वेशन बायोलॉजी इंस्टीट्यूट और येल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नई बात पाई है। जंगली जानवर केवल इंसानों द्वारा बनाए गए भूभाग पर ही नहीं, बल्कि इंसानों के आसपास मौजूद होने पर भी प्रतिक्रिया देते हैं। जर्नल साइंस में प्रकाशित इस अध्ययन ने 37 प्रजातियों के 4,581 स्तनधारियों और पक्षियों के जीपीएस ट्रैकिंग डेटा को, पूरे अमेरिका से जुटाए गए गुमनाम मोबाइल लोकेशन डेटा के साथ जोड़ा।

शोधकर्ताओं ने 2019 और 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन के मिलते-जुलते समय में जानवरों की गतिविधियों की तुलना की। उस दौरान पाबंदियों ने लोगों के आने-जाने के तरीके को बहुत बदल दिया था, जिसे टीम ने 'एंथ्रोपॉज़' नाम दिया है। इससे शोधकर्ता सड़कों, खेतों और शहरों जैसे स्थायी भूभाग बदलावों के असर को, इंसानों की मौजूदगी के असर से अलग कर सके। टीम के अनुसार, वन्यजीवों के अध्ययन में गुमनाम मोबाइल लोकेशन डेटा का इस तरह इस्तेमाल पहली बार हुआ।

अध्ययन में शामिल 57% प्रजातियां इंसानों की मौजूदगी और भूभाग में बदलाव, दोनों से प्रभावित हुईं। केवल इंसानों की मौजूदगी से ही अध्ययन में शामिल 67% स्तनधारी और 68% पक्षी प्रजातियों के इलाके या रहवास क्षेत्र में बदलाव आया। जहां इंसान मौजूद थे और भूभाग भी बदला हुआ था, वहां 67% स्तनधारी और 41% पक्षी प्रजातियों ने अपने रहवास क्षेत्र को घटा दिया। यह असर शहरों की तुलना में राष्ट्रीय उद्यानों जैसे कम विकसित इलाकों में सबसे ज़्यादा देखा गया।

प्रजातियों के अनुसार प्रतिक्रिया काफी अलग रही। भेड़ियों ने इंसानों के आसपास अपना रहवास क्षेत्र बढ़ा लिया, जिसे शोधकर्ताओं ने इंसानों से दूर रहने के उनके लंबे इतिहास का असर बताया। सफेद पूंछ वाले हिरणों का रहवास क्षेत्र भूभाग बदलाव बढ़ने पर बढ़ा, लेकिन इंसानों की मौजूदगी बढ़ने पर घट गया। सैंडहिल सारसों में इसका उल्टा रुझान देखा गया। अध्ययन की सह-प्रमुख और यूसी सांता बारबरा की शोधकर्ता रूथ ऑलिवर ने कहा कि ये निष्कर्ष बताते हैं कि एक ही सामान्य तरीके के बजाय हर प्रजाति के लिए अलग संरक्षण रणनीति ज़रूरी है।

शब्दों की व्याख्या

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