महिला उद्यमियों को पीछे धकेलता 'डिजिटल बहिष्करण जाल': IIT खड़गपुर का अध्ययन
भारत में महिलाओं की छोटी कंपनियां एक साल में करीब 70% बढ़ीं। फिर भी उत्तर प्रदेश की 48 महिला उद्यमियों पर IIT खड़गपुर के अध्ययन में पाया गया कि डर, कमज़ोर प्रशिक्षण और बिना वेतन घरेलू काम के बोझ के कारण कई डिजिटल उपकरणों तक नहीं पहुंच पातीं।
चरण दर चरण
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कम कौशल से तकनीक का डर बढ़ता है
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डर व्यावहारिक अभ्यास रोकता है
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कम अभ्यास दूरी और बढ़ाता है
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चक्र दोहराता है, महिलाएं बाहर रह जाती हैं
भारत में महिलाओं द्वारा चलाई जा रही छोटी कंपनियां पिछले एक साल में करीब 70% बढ़ी हैं। लेकिन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर (IIT खड़गपुर) के एक नए अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि इनमें से कई उद्यमी एक 'डिजिटल बहिष्करण जाल' में फंसी हैं, जो उन्हें आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए ज़रूरी तकनीक से दूर रखता है। शोधकर्ता रुचि सिंह और बिनीता तिवारी ने यह अध्ययन किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में परिधान निर्माण से लेकर डेयरी फार्म तक चलाने वाली, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) चलाने वाली 48 महिलाओं का साक्षात्कार लिया।
अध्ययन बताता है कि सीमित डिजिटल कौशल तकनीक के प्रति डर पैदा करता है। यह डर उन्हें व्यावहारिक अनुभव पाने से रोकता है, जिससे वे डिजिटल बाज़ार से और दूर होती जाती हैं। किसी व्यक्ति के कौशल और आत्मविश्वास को देखने वाले 'ह्यूमन कैपिटल थ्योरी' का उपयोग शोधकर्ताओं ने किया। उन्होंने पाया कि ज़्यादातर महिलाओं को अक्सर सिर्फ़ अंग्रेज़ी में उपलब्ध जटिल डिजिटल इंटरफ़ेस इस्तेमाल करने में आत्मविश्वास की कमी थी। महंगी गलती हो जाने के डर ने इसे और मुश्किल बना दिया। एक प्रतिभागी ने बताया कि खाता हैक होने के बाद उसने डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया।
दूसरा ढांचा, 'जेंडर्ड ऑर्गेनाइज़ेशन्स थ्योरी', महिलाओं की बजाय उनके आसपास की व्यवस्थाओं की ओर इशारा करता है। अध्ययन में पाया गया कि सरकारी प्रशिक्षण कार्यशालाएं अक्सर बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान मान लेती हैं, जो कई महिलाओं के पास नहीं था। घर के काम और बच्चों की देखभाल की 'दूसरी पारी' के कारण महिलाओं के पास नया सॉफ़्टवेयर सीखने या ऑनलाइन दुकान चलाने का समय ही नहीं बचता। स्मार्टफ़ोन रखने वाली महिलाएं भी अक्सर डिजिटल काम के लिए पति या बच्चों पर निर्भर रहती हैं, जिससे वे डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पातीं।
शोधकर्ता आगाह करते हैं कि 'स्नोबॉल सैंपलिंग' से चुनी गई इन 48 महिलाओं पर आधारित नतीजे पूरे भारत का नियम नहीं, बल्कि एक राज्य की झलक भर हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 33% योगदान देते हैं। अध्ययन स्थानीय भाषाओं में दिए जाने वाले और तकनीकी कौशल के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाने वाले बुनियादी प्रशिक्षण की सिफ़ारिश करता है।
शब्दों की व्याख्या
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