समुद्री पानी से यूरेनियम छानने वाली झिल्ली: IISc वैज्ञानिकों का डिज़ाइन
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने एक खास संरचना वाली झिल्ली बनाई है, जो यूरेनियम आयनों को रोकती है और समुद्री पानी के बाकी आयनों को स्वतंत्र रूप से गुज़रने देती है। यह समुद्र के कहीं बड़े यूरेनियम भंडार का इस्तेमाल करने की दिशा में एक कदम है।
चरण दर चरण
- 1
समुद्री पानी COF झिल्ली से गुज़रता है
- 2
झिल्ली संरचना यूरेनिल आयनों को रोकती है
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अन्य आम आयन स्वतंत्र रूप से गुज़रते हैं
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शुद्ध यूरेनियम उपयोग के लिए इकट्ठा होता है
बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के वैज्ञानिकों ने समुद्री पानी से यूरेनियम निकालने की एक नई विधि विकसित की है। इसका इस्तेमाल भूजल में यूरेनियम संदूषण को हटाने के लिए भी किया जा सकता है। संस्थान का कहना है कि यह तकनीक लंबे समय तक परमाणु ईंधन की ज़रूरतें पूरी करने में मदद कर सकती है, साथ ही भूजल में यूरेनियम की समस्या को भी हल कर सकती है, जो एक पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिम है। ज़मीन पर यूरेनियम भंडार तेज़ी से घट रहे हैं। ज़मीन पर अनुमानित 7.5 मिलियन टन यूरेनियम है, जबकि समुद्री पानी में करीब 4.5 अरब टन यूरेनियम घुला है।
पहले की विधियों में ऐसे छिद्रयुक्त कार्बनिक पॉलिमर और कार्यात्मक नैनोमटीरियल इस्तेमाल होते थे, जो यूरेनियम आयनों से रासायनिक रूप से जुड़ जाते थे। लेकिन समुद्री पानी में कई अन्य आयन भी होते हैं, जिससे सिर्फ़ यूरेनियम को चुनकर अलग करना मुश्किल था। IISc के भौतिकी विभाग के शोधकर्ताओं ने 'स्लिप्ड' कोवैलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (COF) झिल्ली डिज़ाइन कर इस समस्या को हल किया। ये परतदार सामग्री यूरेनिल आयनों को पूरी तरह रोकती हैं, जबकि समुद्री पानी के आम आयनों को स्वतंत्र रूप से गुज़रने देती हैं।
प्रबल के. मैती के मार्गदर्शन में योगेंद्र कुमार और बिनु वर्गीज़ के नेतृत्व वाली टीम ने बेंगलुरु की एक्सेंचर लैब्स के साथ मिलकर यह शोध किया। उन्होंने आयनों की जलयोजन संरचना, झिल्ली की मुक्त-ऊर्जा बाधा और घर्षण का अध्ययन किया। इससे पता चला कि COF परतों की खास संरचना ही अलग-अलग आयनों की गति को नियंत्रित करती है। पुरानी विधियां यूरेनियम को बांधने के लिए रासायनिक क्रियात्मक समूहों पर निर्भर थीं। नई विधि परतों को एक-दूसरे पर थोड़ा खिसकाकर, COF परतों की नैनो-संरचना के ज़रिए ही आयन गति को नियंत्रित करती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन दिखाता है कि परतदार COF झिल्लियों की संरचना को सटीक रूप से डिज़ाइन कर आयनों के रास्ते और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। उनके मुताबिक, इससे पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्रों में पदार्थों को चुनकर अलग करने की नई तकनीकों का रास्ता खुल सकता है।
शब्दों की व्याख्या
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