तंत्रिका ऊतक की मरम्मत के लिए रूस की पहली स्वदेशी विधि
कुबान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी का कहना है कि उसने तंत्रिका कोशिकाओं से भरे बायोसिंथेटिक मैटेरियल से तंत्रिका की क्षति सुधारने की रूस की पहली विधि बनाई है। इसी प्रोजेक्ट में जलने और बड़े घावों के इलाज के लिए “कृत्रिम त्वचा” भी तैयार हुई है।
कुबान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने बायोसिंथेटिक मैटेरियल से खराब हुए तंत्रिका ऊतक की मरम्मत करने की रूस की पहली विधि विकसित की है। ये ऐसे मैटेरियल हैं जिनमें बनाई गई संरचना के साथ जीवित कोशिकाएँ जुड़ी होती हैं। यह काम यूनिवर्सिटी के बड़े “रीजनरेटिव मेडिसिन” प्रोजेक्ट के तहत हुआ। यह नतीजा किसी प्रकाशित शोधपत्र के रूप में नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी के बयान के जरिए सामने आया है।
भरे होने का मतलब है कि इस्तेमाल से पहले मैटेरियल में जीवित तंत्रिका कोशिकाएँ बसाई जाती हैं। यूनिवर्सिटी के रेक्टर प्रोफेसर सेर्गेई अलेक्सींको ने कहा, “तंत्रिका ऊतक की कोशिकाओं से भरे बायोसिंथेटिक मैटेरियल से तंत्रिका की क्षति सुधारने की विधि विकसित की गई है। इस समय रूस में बड़ी तंत्रिका क्षति की मरम्मत के लिए कोई स्वदेशी इम्प्लांट पंजीकृत नहीं है। इसलिए यह काम इस क्षेत्र में अनोखा है।”
इसी प्रोजेक्ट में यूनिवर्सिटी ने जिसे “कृत्रिम त्वचा” कहा है, वह भी बनाई गई है — यह बड़े त्वचा घावों और जलने के इलाज के लिए एक मैटेरियल है।
अलेक्सींको ने बताया कि ऊतक पुनर्जनन पर शोध के लिए एक बायोरिएक्टर भी बनाया गया है — यह ऐसा पात्र है जो नियंत्रित हालात में जीवित कोशिकाओं को बढ़ने देता है। उन्होंने यह भी कहा कि जानवरों पर किए गए प्रयोगों से अंगों और ऊतकों के लिए जैविक स्कैफोल्ड के अनोखे नमूने मिले हैं। स्कैफोल्ड एक सहारा ढांचा होता है, जिस पर और जिसके भीतर कोशिकाएँ बढ़कर नया ऊतक बनाती हैं।
यूनिवर्सिटी की एक और शोध दिशा रीजनरेटिव मेडिसिन की तकनीकों को आगे बढ़ाने वाले तरीके विकसित करने पर केंद्रित है।
शब्दों की व्याख्या
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