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हेपेटाइटिस बी के इलाज के लिए CRISPR तकनीक पर रूसी कंपनी और विश्वविद्यालय को अनुदान

R-Pharm और सेचेनोव विश्वविद्यालय को क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी को पूरी तरह खत्म करने के लिए CRISPR-Cas9 जीन-एडिटिंग पर आधारित उत्पादन मंच बनाने के लिए रूसी सरकारी अनुदान मिला है।

चरण दर चरण

  1. 1

    CRISPR-Cas9 को झिल्ली नैनोकणों में पैक करना

  2. 2

    नैनोकणों को पूरे शरीर में पहुंचाना

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    Cas9 द्वारा हेपेटाइटिस बी वायरस के DNA को काटना

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    लक्ष्य: वायरस का पूरी तरह खात्मा

रूसी दवा कंपनी R-Pharm और सेचेनोव विश्वविद्यालय की उस परियोजना को अनुदान मिला है, जो जीनोम-एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी के इलाज के लिए एक उत्पादन मंच बनाना चाहती है। यह अनुदान रूसी विज्ञान फाउंडेशन की उस प्रतियोगिता में मिला, जो शिक्षाविद येवगेनी वेलिखोव की याद में आयोजित की गई थी। राष्ट्रपति के निर्देश पर आयोजित इस प्रतियोगिता का मकसद दवा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई जैव-अर्थव्यवस्था तकनीकें विकसित करना था।

इस परियोजना में एक बड़े पैमाने पर काम करने वाला मंच बनाया जा रहा है। यह हेपेटाइटिस बी वायरस को निशाना बनाने वाले CRISPR-Cas9 कॉम्प्लेक्स को झिल्ली नैनोकणों में पैक करता है, ताकि इन जीन-संपादकों को पूरे शरीर में पहुंचाकर वायरस को पूरी तरह खत्म किया जा सके। CRISPR-Cas9 एक लक्षित जीनोम-एडिटिंग तकनीक है, जिसे कभी-कभी 'मॉलिक्यूलर कैंची' भी कहा जाता है। यह Cas9 नामक प्रोटीन पर आधारित है, जो तकनीक द्वारा तय की गई जगह पर DNA को काटता है।

R-Pharm के अनुसार, तुलनीय तरीकों में एक नैनोकण में 20 से 60 प्रतियां ही भरी जा सकती हैं, जबकि इस मंच में 200 तक प्रतियां भरी जा सकती हैं, जिससे असर बेहतर होता है। यह दवा कम गैर-लक्षित गतिविधि और संक्रमित लिवर कोशिकाओं के लिए ज़्यादा सटीकता के साथ डिज़ाइन की गई है, और इसे सिर्फ एक बार दी जाने वाली खुराक के तौर पर बनाया गया है, जिससे इलाज की लागत घट सकती है। R-Pharm के पार्टनर रिलेशंस निदेशक व्लादिमीर आंद्रियानोव के मुताबिक, जीनोम एडिटिंग आज वैश्विक बायोटेक के सबसे गतिशील क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने बताया कि दुनिया में इस स्तर की एंड-टू-एंड परियोजनाएं गिनी-चुनी ही हैं। उनके मुताबिक, रूस में पूरा चक्र तैयार करने वाला मंच बनाने का यह पहला अनुभव है।

रूसी विज्ञान फाउंडेशन का यह अनुदान परियोजना को प्रयोगशाला के विकास से एक पायलट औद्योगिक प्रोटोटाइप तक ले जाने में मदद करेगा। कंपनी का कहना है कि इस मंच में अलग-अलग बीमारी को निशाना बनाने पर मूल ढांचा वही रहता है, सिर्फ गाइड वाले हिस्से को फिर से तैयार करना पड़ता है, जिससे व्यक्तिगत इलाज प्रोटोकॉल का रास्ता खुलता है।

शब्दों की व्याख्या

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