हर शहर का खाद्य उत्सर्जन अलग क्यों है, बताता है नया वैश्विक डेटाबेस
12,000 से ज़्यादा शहरों के खाद्य-संबंधी उत्सर्जन को मैप करने वाले लीडेन विश्वविद्यालय के डेटाबेस में पाया गया कि एक ही टिकाऊ खानपान कहीं उत्सर्जन घटाता है तो कहीं बढ़ा देता है।
नीदरलैंड्स के लीडेन विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान संस्थान (CML) के शोधकर्ताओं ने 159 देशों के 12,228 शहरों में खाद्य खपत से जुड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को मैप करने वाला एक डेटाबेस बनाया है। जर्नल एनवायरनमेंटल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि दुनिया के 200 सबसे बड़े शहर मिलकर शहरी खाद्य-संबंधी उत्सर्जन का लगभग आधा हिस्सा हैं।
शोधकर्ताओं ने सेहत और टिकाऊपन को जोड़ने वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य EAT-Lancet खानपान को अपनाने के असर की जांच की। मुख्य लेखिका होंग्यी काई ने बताया कि एम्स्टर्डम में इसे अपनाने से उत्सर्जन 45% से 50% तक घट सकता है, क्योंकि नीदरलैंड्स की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पहले से ही कुशल है और सबसे बड़ा फायदा मांस कम खाने से मिलता है। लेकिन ढाका और दिल्ली जैसे शहरों में लोग पहले से ही कम पशु उत्पाद खाते हैं, इसलिए सह-लेखिका श्रुति जैन के मुताबिक वही खानपान वहां उत्सर्जन को वास्तव में बढ़ा सकता है। उनका कहना है कि इन शहरों को टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला के साथ-साथ पौष्टिक भोजन तक व्यापक पहुंच की ज़रूरत है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्ययन किए गए शहरों के बीच उत्सर्जन के अंतर का लगभग 48% हिस्सा खानपान की वजह से है। एक और 48% खाद्य आपूर्ति श्रृंखला की क्षमता की वजह से, और बाकी 4% उम्र जैसी जनसांख्यिकीय वजहों से है। इसी आधार पर टीम ने शहरों को चार तरह में बांटा। पेरिस और बर्लिन जैसे उपभोग-प्रधान शहर, जहां आपूर्ति श्रृंखला कुशल है इसलिए खानपान बदलने से सबसे ज़्यादा फायदा होगा। जकार्ता और ढाका जैसे उत्पादन-प्रधान शहर, जहां ज़्यादातर पौधों पर आधारित खानपान होने के बावजूद ज़्यादा उत्सर्जन वाला खाद्य उत्पादन नुकसान कर रहा है। लीमा और साओ पाउलो जैसे मिश्रित शहर, जो दोनों चुनौतियों का सामना करते हैं। और काहिरा जैसे शहर, जहां मुख्य समस्या ठीक-ठीक पता लगाने के लिए अभी पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि पेरिस के मुकाबले लीमा के लोग ज़्यादा पौधों पर आधारित खाना खाते हैं, फिर भी पेरू का खाद्य-संबंधी उत्सर्जन फ्रांस की राजधानी से तीन गुना ज़्यादा है, क्योंकि लीमा में खाद्य उत्पादन और वितरण कम कुशल है। टीम ने मैटिल्डा-सिटी (MATILDA-City) नाम का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी बनाया है, ताकि शहर अपने खाद्य उत्सर्जन की तुलना दूसरों से कर सकें और सबसे कारगर उपाय ढूंढ सकें।
शब्दों की व्याख्या
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