अफ्रीका भर में मलेरिया के हॉटस्पॉट बदल रहा है जलवायु परिवर्तन: अध्ययन
नेचर पत्रिका में छपे एक अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के चलते अफ्रीका में मलेरिया का प्रसार पश्चिम और मध्य से खिसककर पूर्व और दक्षिण की ओर बढ़ रहा है।
29 जुलाई को जर्नल नेचर में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन धीरे-धीरे अफ्रीका में मलेरिया के नक्शे को बदल रहा है। शोधकर्ताओं ने एक सदी से भी ज़्यादा समय के बच्चों में मलेरिया के आंकड़ों का इस्तेमाल किया। उन्होंने पाया कि इसका प्रसार पश्चिम और मध्य अफ्रीका से धीरे-धीरे पूर्वी और दक्षिणी इलाकों की ओर खिसक रहा है, जो वैश्विक तापमान वृद्धि के अनुरूप है। अध्ययन में शामिल दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन विश्वविद्यालय के जलवायु वैज्ञानिक रोमारिक ओडूलामी ने कहा, "मलेरिया का प्रसार और मच्छरों का जीवनचक्र तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील हैं।"
प्रयोगशाला अध्ययनों से पता चला है कि मच्छरों के ज़रिए मलेरिया का प्रसार लगभग 25 डिग्री सेल्सियस पर सबसे ज़्यादा होता है, और 19 डिग्री से नीचे या 34 डिग्री से ऊपर घट जाता है। नाइजीरिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो जैसे हॉटस्पॉट वाले पश्चिम और मध्य अफ्रीका में ऐतिहासिक रूप से ऐसा तापमान रहा है। यह मलेरिया फैलाने वाले परजीवी प्लाज़्मोडियम और उसे फैलाने वाले एनोफिलीज़ मच्छर, दोनों के लिए अनुकूल है। वहीं ऊंचाई वाले पूर्वी अफ्रीका और तटीय दक्षिणी अफ्रीका में आमतौर पर बड़े पैमाने पर प्रसार के लिए तापमान बहुत कम रहा है।
ओडूलामी और उनके साथियों ने बच्चों में मलेरिया की व्यापकता को तापमान और बारिश से जोड़ने वाला एक कंप्यूटर मॉडल बनाया, और उसकी तुलना बिना जलवायु परिवर्तन वाले काल्पनिक मॉडल से की। उन्होंने पाया कि 1901 से 2014 के बीच, जलवायु परिवर्तन ने पूरे उप-सहारा अफ्रीका में मलेरिया प्रसार में संभवतः 0.5% की शुद्ध वृद्धि की, जबकि पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में यह वृद्धि कहीं ज़्यादा थी। उदाहरण के लिए, इथियोपिया के पहाड़ी इलाकों में शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि हर 1,000 बच्चों पर मलेरिया प्रसार में 8 मामलों की बढ़ोतरी हुई। वहीं पश्चिम अफ्रीका के कुछ हिस्सों में प्रसार 1% से 2% तक घटा, यानी हर 1,000 बच्चों पर करीब चार मामले कम हुए।
शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, दुनिया भर में 2.7 डिग्री सेल्सियस के मध्यम तापमान वृद्धि परिदृश्य में, अगले 85 सालों में पूरे उप-सहारा अफ्रीका में मलेरिया प्रसार दर में कुल मिलाकर 2% की कमी आने का अनुमान है। इटली के ट्रीस्टे स्थित अब्दुस सलाम इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिज़िक्स के जलवायु वैज्ञानिक सिरिल कैमिनेड इस अध्ययन में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि मलेरिया का प्रसार अब भी जलवायु से होने वाले बदलावों के मुकाबले मच्छरदानी, कीटनाशक उपचार और बचाव की दवाओं जैसे नियंत्रण उपायों से कहीं ज़्यादा प्रभावित होता है।
शब्दों की व्याख्या
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