सूरज की आकाशगंगा-यात्रा और प्राचीन विस्फोटों ने बदली पृथ्वी की जलवायु?
नासा द्वारा वित्तपोषित दो अध्ययन बताते हैं कि आकाशगंगा के ठंडे इलाकों से सूरज के गुजरने और उसकी युवावस्था के शक्तिशाली विस्फोटों ने पृथ्वी की प्राचीन जलवायु को प्रभावित किया होगा। इसमें हिमयुग और युवा ग्रह का तरल पानी के लिए पर्याप्त गर्म बने रहना भी शामिल है।
चरण दर चरण
- 1
सूरज आकाशगंगा से होकर गुजरता है
- 2
घने अंतरतारकीय कोल्ड क्लाउड से टकराता है
- 3
हीलियोस्फीयर पृथ्वी की कक्षा से छोटा सिकुड़ता है
- 4
पृथ्वी आकाशगंगा के हाइड्रोजन के संपर्क में आती है
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वायुमंडलीय जलवाष्प बढ़ती है, जलवायु बदलती है
सूरज सिर्फ पृथ्वी को रोशनी और गर्मी ही नहीं देता। नासा द्वारा वित्तपोषित दो नए अध्ययन बताते हैं कि सूरज के अतीत की घटनाओं ने पृथ्वी की जलवायु को अप्रत्याशित तरीकों से प्रभावित किया होगा — प्राचीन तापमान बदलावों से लेकर युवा ग्रह को तरल पानी बनाए रखने लायक गर्म रखने तक।
एक अध्ययन नासा के शील्ड (SHIELD, यानी सौर वायु और अंतरिक्ष के वातावरण का अध्ययन करने वाला नासा केंद्र) से जुड़ा है। इसमें यह जांचा गया कि हीलियोस्फीयर — सूरज की सौर वायु से बना वह सुरक्षा कवच जो पूरे सौरमंडल को घेरे रहता है — समय के साथ आकाशगंगा में कैसे आगे बढ़ा। 21 अगस्त को एनुअल रिव्यू ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन का नेतृत्व बोस्टन विश्वविद्यालय में शील्ड की प्रमुख वैज्ञानिक मेराव ओफर ने किया।
कंप्यूटर सिमुलेशन का इस्तेमाल कर ओफर और उनके सहयोगियों ने पाया कि सौरमंडल बीते कई मिलियन वर्षों में कम से कम तीन बार ठंडे, घने अंतरतारकीय “कोल्ड क्लाउड” से होकर गुजरा — करीब 2-3, 6-7, और 13-14 मिलियन वर्ष पहले। इन बादलों ने हीलियोस्फीयर को इतना दबाया होगा कि वह पृथ्वी की कक्षा से भी छोटा सिकुड़ गया, जिससे पृथ्वी कुछ समय के लिए सूरज के सुरक्षा कवच के बाहर आ गई होगी। यह समय गहरे समुद्र की तलछट, अंटार्कटिक बर्फ और चंद्रमा के नमूनों में मिले अंतरतारकीय धूल से जुड़े तत्वों के समय से मेल खाता है।
सिमुलेशन में, पृथ्वी के वायुमंडल को घने, ठंडे आकाशगंगा के हाइड्रोजन बादल के संपर्क में लाने पर वायुमंडलीय जलवाष्प बढ़ गई और ऊपरी वायुमंडल की स्थितियां बदल गईं, जिनका असर आखिरकार सतह तक पहुंचा। इससे संभवतः लंबे समय तक चलने वाले जलवायु परिवर्तनों में योगदान मिला, जिनमें हिमयुग भी शामिल हैं। शील्ड, नासा के ड्राइव (DRIVE - Diversify, Realize, Integrate, Venture, Educate, यानी अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को साथ लाने वाला नासा का कार्यक्रम) साइंस सेंटरों में से एक है। यह हीलियोस्फीयर का एक “डिजिटल ट्विन” (असली प्रणाली को दर्शाने वाला विस्तृत कंप्यूटर मॉडल) बना रहा है।
मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट में स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वैज्ञानिक व्लादिमीर आइरापेटियन के नेतृत्व में एक दूसरा अध्ययन हुआ। इसने “फेंट यंग सन पैराडॉक्स” (धुंधले युवा सूरज की पहेली) नाम की एक अलग पहेली की पड़ताल की। करीब तीन अरब वर्ष पहले सूरज आज की तुलना में सिर्फ 70% ही चमकीला था, यानी सैद्धांतिक रूप से पृथ्वी पूरी तरह जमी होनी चाहिए थी। लेकिन भूवैज्ञानिक साक्ष्य दिखाते हैं कि उससे बहुत पहले से पृथ्वी पर स्थिर तरल पानी मौजूद था। निष्कर्ष बताते हैं कि युवा सूरज से उठे शक्तिशाली सौर विस्फोटों ने पृथ्वी के शुरुआती वायुमंडल में मजबूत ग्रीनहाउस गैसें बनाने में मदद की होगी।
शब्दों की व्याख्या
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