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वैज्ञानिकों ने जीवन के लिए अहम अभिक्रिया में पानी के पुनर्गठन की पहली आणविक तस्वीरें खींचीं

PNNL के नेतृत्व वाली टीम ने प्रकाश-प्रेरित एक रासायनिक अभिक्रिया के दौरान इलेक्ट्रॉन-प्रोटॉन गति और आसपास के पानी के फिर से व्यवस्थित होने के बीच के जुड़ाव को पहली बार आणविक स्तर पर दर्ज किया। नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित यह शोध बेहतर फ्लो बैटरी, फ्यूल…

चरण दर चरण

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    रुथेनियम अणु पर प्रकाश पड़ता है

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    अणु की इलेक्ट्रॉनिक संरचना बदलती है

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    अणु एक प्रोटॉन ग्रहण करता है

  4. 4

    आसपास का पानी फिर से व्यवस्थित होता है

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    अल्ट्राफास्ट एक्स-रे इस क्रम को दर्ज करते हैं

अमेरिकी ऊर्जा विभाग की पैसिफिक नॉर्थवेस्ट नेशनल लेबोरेटरी (PNNL) के नेतृत्व में एक शोध दल ने SLAC नेशनल एक्सेलरेटर लेबोरेटरी और कई विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने प्रकाश से शुरू होने वाली एक रासायनिक अभिक्रिया के दौरान किसी अणु के भीतर इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के एक साथ गति करने की पहली आणविक-स्तर की तस्वीरें खींचीं। इसी दौरान अणु की इलेक्ट्रॉनिक संरचना में हो रहे बदलाव और उसके आसपास के पानी के अणुओं के फिर से व्यवस्थित होने को भी साथ-साथ दर्ज किया गया। यह शोध नेचर कम्युनिकेशन्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

इस अभिक्रिया को प्रोटॉन-युग्मित इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण (PCET) कहा जाता है। इसमें ऋणात्मक आवेश वाले इलेक्ट्रॉन और धनात्मक आवेश वाले प्रोटॉन मिलकर साथ-साथ गति करते हैं। प्रकृति में यह अब तक ज्ञात सबसे ऊर्जा-कुशल प्रक्रियाओं में से एक है। पौधे सूर्य के प्रकाश को पकड़कर उसे संचित ऊर्जा में बदलने के लिए इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं। इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के साथ-साथ गति करने से अणु ऊर्जा बर्बाद करने वाले बीच के चरणों को टाल देते हैं। इससे अभिक्रिया तेज़ और कहीं अधिक ऊर्जा-कुशल हो जाती है। इसे समझने से बेहतर फ्लो बैटरी, फ्यूल सेल और उत्प्रेरक (catalyst) डिज़ाइन करने में मदद मिल सकती है।

टीम ने SLAC की लीनैक कोहेरेंट लाइट सोर्स की अल्ट्राफास्ट एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके साथ क्वांटम रसायन विज्ञान की गणनाएं और आणविक गतिकी सिमुलेशन भी जोड़े गए। इस तरह टीम ने पहली बार यह देखा कि जब अणु एक प्रोटॉन ग्रहण करता है, तो उसके विशेष हिस्सों में इलेक्ट्रॉनिक संरचना किस तरह बदलती है। साथ ही यह भी देखा गया कि आसपास के पानी के अणु किस तरह फिर से व्यवस्थित होते हैं। PNNL की प्रयोगात्मक रासायनिक भौतिकशास्त्री एलिसा बियासिन ने इस पर बात की। उन्होंने कहा, “हमने पहली बार यह दर्ज किया है कि प्रोटॉन स्थानांतरण से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक बदलाव आसपास के विलायक (solvent) के फिर से व्यवस्थित होने के साथ जुड़े हुए हैं।”

इस प्रयोग में रुथेनियम-आधारित एक अच्छी तरह अध्ययन किए गए अणु का इस्तेमाल किया गया, जो प्रकाश को सोखता है और अम्लीय परिस्थितियों में अपने आसपास से एक प्रोटॉन ग्रहण करता है। इस अध्ययन के सह-अन्वेषक और न्यूज़ीलैंड की ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ व्याख्याता क्रिस्टोफर लार्सन ने इस बारे में बताया। उन्होंने कहा, “हमने इस अध्ययन में इस्तेमाल किए गए धातु परिसर को इसलिए चुना क्योंकि इसमें अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक और संरचनात्मक बदलाव नहीं होते”। उन्होंने बताया कि इससे एक्स-रे संकेतों की व्याख्या जटिल नहीं होती, और इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा विलायक की गति से जुड़े संकेतों को अलग-अलग पहचाना जा सका।

शब्दों की व्याख्या

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