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'सॉफ्ट क्रॉसलिंकिंग' तरकीब भंगुर प्लास्टिक को सख्त और मज़बूत दोनों बनाती है

जापानी शोधकर्ताओं ने एक बड़े आकार के आयनिक योजक का इस्तेमाल कर एक कंघी-आकार का पॉलिमर डिज़ाइन किया है, जो कांच जैसे प्लास्टिक में आम तौर पर होने वाले समझौते को पलट देता है। यह पदार्थ को करीब चार गुना ज़्यादा मज़बूत और दोगुना सख्त बनाता है।

कांच जैसे पॉलिमर वे प्लास्टिक होते हैं, जिनकी आणविक शृंखलाएं एक तय तापमान से नीचे स्थिर हो जाती हैं। इससे वे सख्त और कड़े हो जाते हैं, लेकिन भंगुर भी हो जाते हैं, इसलिए खींचे जाने पर टूट जाते हैं। इस समझौते से पार पाने का एक तरीका है ऐसे आयनिक समूह जोड़ना, जिनके इलेक्ट्रोस्टैटिक आकर्षण प्रत्यावर्तनीय भौतिक क्रॉसलिंक बनाते हैं। लेकिन इस तरीके को पारंपरिक कांच जैसे पॉलिमर पर लागू करना मुश्किल रहा है, क्योंकि इससे वे किसी नए तरीके से भंगुर हो जाते हैं।

जापान के टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस (TUS) के शोधकर्ताओं ने जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी (JST) के साथ मिलकर, बड़े आकार के 4-डाइमिथाइलअमीनोपिरिडीन (DMAP) काउंटरआयन का इस्तेमाल कर एक आयनिक कंघी-आकार का पॉलिमर बनाया। यह आयनिक अंतःक्रियाओं को समान रूप से फैला हुआ रखने में मदद करता है। उस समय के जूनियर एसोसिएट प्रोफेसर डाइसुके आओकी के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में कोतारो उचियामा, र्योतारो मियाज़ावा और प्रोफेसर कोजी अरिमित्सु भी शामिल थे। यह Macromolecules पत्रिका में 4 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुआ।

टीम ने कंघी-आकार के पॉलिमर बनाए। उन्हें बड़े आकार के DMAP काउंटरआयन या पारंपरिक सोडियम आयन से न्यूट्रलाइज़ कर दोनों के असर की तुलना की। सोडियम आयन की ज़्यादा मात्रा से पॉलिमर लगातार ज़्यादा भंगुर होते गए। लेकिन DMAP ने कई तरह की सांद्रता में यांत्रिक प्रदर्शन को बेहतर बनाया। सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले DMAP-न्यूट्रलाइज़्ड पॉलिमर ने करीब 137 MJ/m³ की मज़बूती और करीब 0.9 GPa का यंग मापांक हासिल किया। यह गैर-आयनिक शुरुआती पदार्थ से करीब चार गुना ज़्यादा मज़बूत और दोगुना सख्त है।

एक्स-रे स्कैटरिंग जांच से पता चला कि DMAP एक समान नैनो संरचना बनाता है, जिसमें कोई पहचाने जाने लायक चरण पृथक्करण नहीं होता। इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी ने पॉलिमर के भीतर आयनीकरण की पुष्टि की। रियोलॉजिकल टेस्ट में पाया गया कि DMAP कांच संक्रमण तापमान को 96°C से घटाकर 81°C कर देता है। यह प्लास्टिसाइज़र की तरह काम कर पॉलिमर शृंखलाओं को ज़्यादा गतिशीलता देता है। "DMAP एक प्लास्टिसाइज़र और भौतिक क्रॉसलिंकिंग बिंदु, दोनों की तरह काम करता है। इससे एक अनोखी नैनो संरचना बनती है, जिसे हम 'सॉफ्ट क्रॉसलिंकिंग' कहते हैं," आओकी ने कहा।

"यह शोध उस पारंपरिक धारणा को पलट देता है कि आयनिक अंतःक्रियाओं से डिज़ाइन किए जाने पर कांच जैसे पॉलिमर भंगुर हो जाते हैं," आओकी ने कहा। "इस खोज को व्यापक आणविक डिज़ाइनों पर लागू करने से अगली पीढ़ी के प्लास्टिक पदार्थ विकसित होंगे, जो कम टूटेंगे और ज़्यादा समय तक चलेंगे। भविष्य में ये लंबे समय तक चलने वाले पदार्थ प्लास्टिक कचरा कम कर सकते हैं। अगर इन्हें ड्रोन और कारों जैसे परिवहन उपकरणों के लिए संरचनात्मक पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल किया जाए, तो ये और भी फायदेमंद होंगे। हल्के डिज़ाइनों के ज़रिए ये कम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन और बेहतर ऊर्जा दक्षता में भी योगदान दे सकते हैं," उन्होंने आगे कहा।

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