पुरस्कार को लेकर मस्तिष्क की प्रतिक्रिया ही मानसिक लचीलेपन की कुंजी: 9/11 बचाव-कर्मियों पर अध्ययन
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) बचाव-कर्मियों पर एक नया अध्ययन हुआ है। इसमें पाया गया कि पुरस्कार से जुड़े मस्तिष्क क्षेत्रों में अधिक सक्रियता ही मानसिक रूप से सबसे मजबूत बचाव-कर्मियों को अलग करती है, न कि केवल खुद बताई गई सकारात्मकता। यह अंतर दीर्घकालिक…
11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) पर हुए हमले के बाद राहत-बचाव कार्य में शामिल लोगों पर एक नया अध्ययन हुआ है। इसमें पाया गया है कि मस्तिष्क अपेक्षित पुरस्कारों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है, यह आघात के बाद मानसिक लचीलेपन में अहम भूमिका निभाता है। ये निष्कर्ष जर्नल ‘बायोलॉजिकल साइकियाट्री: कॉग्निटिव न्यूरोसाइंस एंड न्यूरोइमेजिंग’ में प्रकाशित हुए हैं। ये येल स्कूल ऑफ मेडिसिन और माउंट सिनाई के इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं से मिले हैं।
गंभीर आघात झेलने के बावजूद हजारों WTC बचाव-कर्मी मानसिक रूप से मजबूत बने रहे, जबकि कुछ अन्य को दीर्घकालिक PTSD हो गया। सह-मुख्य अन्वेषक और येल स्कूल ऑफ मेडिसिन में मनोचिकित्सा के प्रोफेसर रॉबर्ट एच. पिएत्रज़ाक (Pietrzak) ने कहा, ‘हम यह समझना चाहते थे कि ऐसा क्यों हुआ’। उन्होंने बताया कि फ्लैशबैक और अतिसतर्कता जैसे लक्षणों के अलावा, PTSD किसी व्यक्ति की खुशी, आनंद और प्रेम जैसी सकारात्मक भावनाओं को महसूस करने की क्षमता को भी कम कर सकता है।
पुरस्कार-प्रसंस्करण — यानी सकारात्मक भावना, आशावाद और उम्मीद — का तनाव झेलने की क्षमता से लंबे समय से संबंध माना जाता रहा है। लेकिन इसके पीछे के मस्तिष्क तंत्र का अध्ययन बहुत कम हुआ है। 9/11 के करीब दो दशक बाद, शोधकर्ताओं ने WTC हेल्थ प्रोग्राम जनरल रेस्पॉन्डर कोहोर्ट के प्रतिभागियों को स्कैन किया। यह स्कैन एक पुरस्कार-आधारित कार्य के दौरान फंक्शनल MRI (fMRI) से किया गया। प्रतिभागियों को तीन समूहों में बांटा गया: WTC से जुड़े दीर्घकालिक PTSD वाले बचाव-कर्मी, गंभीर आघात झेलने के बावजूद मानसिक रूप से मजबूत बचाव-कर्मी, और कम आघात झेलने वाले मानसिक रूप से स्वस्थ बचाव-कर्मी।
पुरस्कार से जुड़े मस्तिष्क के दो क्षेत्र अहम हैं — पुरस्कार को पहचानने वाला न्यूक्लियस एकंबेंस, और उसका आकलन करने वाला वेंट्रोमीडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स। मानसिक रूप से सबसे मजबूत समूह में इन दोनों क्षेत्रों की सक्रियता सबसे अधिक बढ़ी। यह बढ़ोतरी PTSD वाले समूह और कम आघात झेलने वाले समूह, दोनों की तुलना में काफी अधिक थी। पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता सारेन सीली (Seeley) ने बताया कि खुद बताई गई सकारात्मक भावना केवल PTSD वाले और बिना PTSD वाले बचाव-कर्मियों के बीच ही फर्क बता पाई। जबकि मस्तिष्क-इमेजिंग डेटा ने मानसिक रूप से मजबूत बचाव-कर्मियों के बीच ऐसा कुछ पकड़ा, जो सेल्फ-रिपोर्ट से छूट गया था।
सह-मुख्य अन्वेषक और माउंट सिनाई के इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन में मनोचिकित्सा की प्रोफेसर एम. मर्सिडीज़ पेरेज़-रोड्रिगेज़ (Perez-Rodriguez) ने भविष्य के शोध के लिए एक परिकल्पना रखी है। यह परिकल्पना है कि क्या पुरस्कार से जुड़ी यह मस्तिष्क क्षमता एक परिवर्तनीय उपचार-लक्ष्य हो सकती है। यानी, क्या PTSD को रोकने या उसका इलाज करने के लिए सकारात्मक परिणामों की पहले से अपेक्षा करने के वास्ते मस्तिष्क को ‘प्रशिक्षित’ किया जा सकता है।
शब्दों की व्याख्या
अब तक की कहानी
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