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मिलते ब्लैक होल की धीमी 'ओवरटोन' को सूचीबद्ध करने का नया तरीका

कैंब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ब्लैक होल के मिलने के तुरंत बाद पैदा होने वाले धीमे द्वितीयक कंपनों को पहचानने का एक डेटा-आधारित तरीका विकसित किया है। इससे आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत को और सटीकता से परखा जा सकेगा।

चरण दर चरण

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    दो ब्लैक होल मिलकर एक बनते हैं

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    नया ब्लैक होल स्थिर होते समय 'बजता' है

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    वह गुरुत्वीय तरंग कंपन भेजता है

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    वैज्ञानिक मोड को समझकर सापेक्षता को परखते हैं

जब दो ब्लैक होल टकराकर आपस में मिलते हैं, तो नया बना बड़ा ब्लैक होल तुरंत शांत नहीं होता; वह एक स्थिर आकार पाने तक 'बजता' रहता है। ब्लैक होल आवाज़ पैदा नहीं कर सकता, इसलिए वह गुरुत्वीय तरंगें भेजता है, जो अंतरिक्ष-समय में लहरें हैं और सबसे पहले अल्बर्ट आइंस्टीन ने इनकी भविष्यवाणी की थी। क्वासिनॉर्मल मोड कहलाने वाले इन कंपनों की आवृत्ति मिले हुए ब्लैक होल के द्रव्यमान और स्पिन पर निर्भर करती है। ये किसी फिंगरप्रिंट की तरह काम करते हैं, जिससे वैज्ञानिक ब्रह्मांड की सबसे चरम गुरुत्वाकर्षण स्थितियों में सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत को परख सकते हैं।

कैंब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक तकनीक विकसित की है, जिसका ब्योरा फिजिकल रिव्यू लेटर्स में छपे एक अध्ययन में दिया गया है। ब्लैक होल के मिलन के कंप्यूटर सिमुलेशन का विश्लेषण कर यह तकनीक इन मोड को ज्यादा सटीकता से पहचानती और सूचीबद्ध करती है। यह तरीका बायेसियन विश्लेषण पर निर्भर करता है, जो किसी डेटासेट के लिए सबसे संभावित व्याख्या ढूंढने के लिए अलग-अलग साक्ष्यों को तौलने वाली एक सांख्यिकीय पद्धति है। इसने रिंगडाउन के दौरान बनने वाले सबसे तेज़ बुनियादी 'स्वर' के अलावा, जल्दी खत्म होने वाले कमजोर हार्मोनिक्स यानी 'ओवरटोन' को भी खोज निकाला, जिन्हें पहचानना कहीं ज्यादा मुश्किल है।

कैंब्रिज के इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनॉमी के रिचर्ड डायर इस अध्ययन के पहले लेखक हैं। उन्होंने कहा, 'सबसे तेज़ मोड गुरुत्वीय तरंग डेटा में आम तौर पर देखा जाता है, लेकिन कई शांत मोड को पहचानना कहीं ज्यादा मुश्किल है।' कौन से मोड मौजूद हैं और वे कब दिखते हैं, इस पर लंबे समय से बहस चलती रही है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी तकनीक इस अनिश्चितता को दूर करने का एक व्यवस्थित, डेटा-आधारित तरीका देती है। बुनियादी स्वर और ओवरटोन से आगे, डायर और सह-लेखक क्रिस्टोफर मूर ने असामान्य 'नॉनलीनियर मोड' भी खोजे। ये तब बनते हैं जब दो या ज्यादा बुनियादी आवृत्तियां आपस में मिलती हैं, और भारी डिस्टॉर्शन के साथ बजाए गए इलेक्ट्रिक गिटार जैसे जटिल संकेत पैदा करती हैं।

डायर और मूर ने अपनी तकनीक को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध उच्च-सटीकता वाले सिमुलेशन के एक बड़े संग्रह पर परखा, जिसमें ब्लैक होल के द्रव्यमान अनुपात और स्पिन की व्यापक रेंज शामिल थी। उन्होंने दर्ज किया कि कौन से मोड पहचाने जा सकते हैं और कब दिखते हैं। ये नतीजे LIGO और Virgo जैसे मौजूदा गुरुत्वीय तरंग डिटेक्टरों के साथ-साथ भविष्य के उपकरणों से मिले अवलोकनों को समझने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, यह जांचने में भी मदद मिल सकती है कि मिले हुए ब्लैक होल के गुण आइंस्टीन के समीकरणों की भविष्यवाणी से मेल खाते हैं या नहीं।

शब्दों की व्याख्या

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