मिर्गी पर फोकस्ड अल्ट्रासाउंड: पायलट ट्रायल में सुरक्षित और व्यावहारिक पाया गया
ताइवान में 12 मरीज़ों पर हुए एक पायलट ट्रायल में पाया गया कि NaviFUS उपकरण से दिया गया कम-तीव्रता वाला फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (LIFU) न्यूरोमॉड्युलेशन दवा-प्रतिरोधी मिर्गी में सुरक्षित और व्यावहारिक रूप से संभव था। हालांकि, रैंडमाइज़्ड, शैम-नियंत्रित ट्रायल में…
चरण दर चरण
- 1
इमेजिंग से सीज़र ज़ोन की पहचान
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असली या शैम LIFU के लिए यादृच्छिक चयन
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हर सत्र में तीन 5-मिनट के अल्ट्रासाउंड
- 4
शैम समूह असली इलाज में बदल सकता था
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फॉलो-अप में दौरों के नतीजों पर नज़र
जिन मरीज़ों पर दवाएं असर नहीं करतीं, ऐसे ‘दवा-प्रतिरोधी मिर्गी’ के इलाज में एक नई तकनीक को सुरक्षित और व्यावहारिक पाया गया है। इस तकनीक को ‘फोकस्ड अल्ट्रासाउंड न्यूरोमॉड्युलेशन’ कहा जाता है। इसमें ध्वनि तरंगों से मस्तिष्क के किसी खास हिस्से को उत्तेजित किया जाता है, और इसके लिए किसी सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह नतीजे एक शुरुआती (पायलट) क्लिनिकल ट्रायल में सामने आए, जिसका नेतृत्व ताइवान के ताइपे वेटरन्स जनरल हॉस्पिटल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सियांग-यू यू ने किया। यह अध्ययन पत्रिका Epilepsia में प्रकाशित हुआ, और यह टीम के पहले के छह मरीज़ों वाले शोध पर आगे बढ़ता है।
इस ट्रायल में जनवरी 2022 से मार्च 2024 के बीच 12 वयस्क मरीज़ों को शामिल किया गया। हर मरीज़ को NaviFUS नाम के उपकरण से कम-तीव्रता वाला फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (LIFU) दिया गया। यह उपकरण न्यूरोनेविगेशन तकनीक की मदद से अल्ट्रासाउंड की किरण को सही जगह तक पहुंचाता है। इलाज हर मरीज़ के ‘सीज़र ऑनसेट ज़ोन’ यानी दौरा शुरू होने वाले मस्तिष्क के हिस्से पर केंद्रित था। इस ज़ोन को क्लिनिकल जांच, MRI, पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) और इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (EEG) समेत कई तरीकों से पहचाना गया।
यह अध्ययन एक रैंडमाइज़्ड (यादृच्छिक), शैम-नियंत्रित (sham-controlled) क्रॉसओवर डिज़ाइन में किया गया। शुरुआत में कुछ मरीज़ों को नकली (शैम) इलाज दिया गया। इसकी बनावट और समय असली इलाज जैसा ही था, लेकिन कोई अल्ट्रासाउंड ऊर्जा नहीं भेजी गई। इसके बजाय, इलाज के दौरान आने वाली आवाज़ों जैसी पहले से रिकॉर्ड की गई पृष्ठभूमि ध्वनियां बजाई गईं। शैम समूह के मरीज़ पहली फॉलो-अप अवधि के बाद चाहें तो असली LIFU इलाज लेने के लिए बदल सकते थे। इस बदलाव के पूरा होने के बाद, दौरों के नतीजों पर और नज़र रखने के लिए फॉलो-अप अवधि बढ़ा दी गई।
हर LIFU सत्र में मरीज़ों को लगातार तीन 5-मिनट के अल्ट्रासाउंड सत्र (sonications) दिए गए, जिनके बीच दो 5-मिनट के अंतराल रखे गए। यह अल्ट्रासाउंड 0.3 वाट प्रति वर्ग सेंटीमीटर की तीव्रता (मैकेनिकल इंडेक्स 0.25) पर दिया गया, जो 0.18 मेगापास्कल के अधिकतम दबाव के बराबर था।
शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि यह तरीका हर मरीज़ के सीज़र ऑनसेट ज़ोन को सटीक तरीके से लक्षित करने में सफल रहा। NaviFUS उपकरण से दिया गया LIFU न्यूरोमॉड्युलेशन सुरक्षित और सहनीय पाया गया, और किसी भी मरीज़ में गंभीर दुष्प्रभाव या ऊतक क्षति नहीं देखी गई। हालांकि, मुख्य क्रॉसओवर विश्लेषण में दौरों को रोकने का कोई सांख्यिकीय रूप से सार्थक असर नहीं मिला। लेखकों ने कहा कि असर की पुष्टि करने और इलाज के पैरामीटर बेहतर बनाने के लिए और शोध की ज़रूरत है। NaviFUS के चेयरमैन डॉ. आर्थर लुंग ने कहा, “यह अध्ययन मिर्गी के लिए फोकस्ड अल्ट्रासाउंड के क्लिनिकल इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम है।”
शब्दों की व्याख्या
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