सब्जियों के नाइट्रेट और आयरन को हृदय-रक्षक अणुओं में बदलते हैं आंत के बैक्टीरिया
कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने पाया कि आंत के बैक्टीरिया सब्जियों के नाइट्रेट और आयरन को मिलाकर DNIC नामक अणु बनाते हैं, जो पशु मॉडल में बेहतर हृदय और चयापचय स्वास्थ्य से जुड़े पाए गए।
चरण दर चरण
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सब्जियां नाइट्रेट और आयरन देती हैं
- 2
आंत के बैक्टीरिया दोनों को मिलाते हैं
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बैक्टीरिया DNIC अणु बनाते हैं
- 4
DNIC लिवर, किडनी में अवशोषित होता है
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अधिक DNIC बेहतर हृदय स्वास्थ्य से जुड़ा
स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने एक नई खोज की है। उन्होंने पाया कि आंत के बैक्टीरिया सब्जियों से मिलने वाले नाइट्रेट और आयरन को ऐसे अणुओं में बदल सकते हैं जो हृदय और चयापचय की रक्षा में मदद कर सकते हैं। यह अध्ययन जर्नल Cell में प्रकाशित हुआ है। चुकंदर, पालक, रॉकेट और लेट्यूस जैसी सब्जियों में नाइट्रेट स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। बीन्स, साबुत अनाज और हरी सब्जियों जैसे पौधों से मिलने वाले भोजन में पाया जाने वाला आयरन का रूप, नॉन-हीम आयरन, भी आहार में आम है। आंत के सूक्ष्मजीव इन दोनों को मिलाकर डाइनाइट्रोसिल आयरन कॉम्प्लेक्स (DNIC) नामक यौगिक बनाते हैं। ये अणु शरीर में अवशोषित होकर मुख्य रूप से लिवर और किडनी तक पहुंचते हैं।
चूहों, कोशिकाओं, बैक्टीरिया और मानव नमूनों का इस्तेमाल कर शोधकर्ताओं ने कई प्रकार के ऊतकों में DNIC का पता लगाया। लेकिन जर्म-फ्री चूहों, यानी बिना किसी आंत बैक्टीरिया के पाले गए चूहों में, DNIC अनुपस्थित पाया गया। इससे पता चलता है कि DNIC बनाने के लिए आंत के बैक्टीरिया जरूरी हैं। कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ शोधकर्ता और अध्ययन के पहले व सह-संगत लेखक आंद्रेई एल. क्लेश्योव ने कहा, "आंत के बैक्टीरिया भोजन के घटकों को जैविक रूप से सक्रिय अणुओं में बदल सकते हैं, जो शरीर के महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित करते हैं।"
इसके बाद शोधकर्ताओं ने हृदय-रक्त और चयापचय रोग के एक पशु मॉडल में DNIC का स्तर बढ़ाया, या तो नाइट्रेट और आयरन वाले आहार सप्लीमेंट देकर, या कृत्रिम रूप से बनाए गए DNIC को देकर। DNIC का स्तर बढ़ने से रक्तचाप कम हुआ, रक्त वाहिकाओं का कामकाज बेहतर हुआ, रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार हुआ और लिवर में वसा जमाव कम हुआ। कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर मैटियास कार्लस्ट्रॉम प्रोफेसर जॉन लुंडबर्ग के साथ अध्ययन के सह-वरिष्ठ लेखक हैं। उन्होंने कहा कि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि नाइट्रेट और आयरन दोनों वाली सब्जी-प्रधान आहार कई बीमारियों के कम जोखिम से क्यों जुड़ी है।
शोधकर्ताओं ने आगाह किया कि अधिकांश काम प्रयोगात्मक मॉडलों में किया गया है, इसलिए यह पुष्टि करने के लिए और शोध जरूरी है कि यह प्रक्रिया इंसानों में कैसे काम करती है। यह अध्ययन जर्मनी के दो चिकित्सा केंद्रों के साथ मिलकर किया गया। ये हैं यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर हैम्बर्ग-एपेनडॉर्फ और जोहानेस गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर मेंज़। अगला कदम इंसानों में DNIC के स्तर को मापने के तरीके विकसित करना और यह जांचना है कि क्या आहार या आंत के माइक्रोबायोटा में बदलाव से DNIC का स्तर बदला जा सकता है।
शब्दों की व्याख्या
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